आतंकवादी हमला करने के लिए अराजक तत्वों द्वारा यूएवी के इस्तेमाल को रोकने के लिए सरकार व्यवस्था बनाने पर विचार कर रही है। इसका मकसद ऐसे खतरों का पता लगाकर उन्हें खत्म किया जा सके और नीची उड़ान भरने वाली चीजों का नियमन किया जा सके। केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि ने कहा कि मानव रहित हवाई वाहनों को नियमित करने की जरूरत है ताकि इनका दुरुपयोग रोका जा सके खासकर आबादी वाले इलाकों और हवाई अड्डा जैसे संवेदशनशील इलाकों में। ‘इंडियाज इंटरनल सिक्योरिटी एंड यूएवीज’ पर एक सेमिनार को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘हमें इसे नियमित करने की जरूरत है। हमें खतरनाक विमानों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने की व्यवस्था बनाने की जरूरत है। हमें सुनिश्चित करने की जरूरत है कि यूएवी का अपहरण अराजक तत्व नहीं करें और उनका दुरुपयोग नहीं कर पाएं।’ गृह सचिव ने कहा कि यूएवी का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने की प्रक्रिया समय के साथ बदलने वाली प्रक्रिया है। विशेषज्ञ इस पर अब भी काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘यह सतत् बदलने वाली प्रौद्योगिकी है। लोग अब भी इसमें लगे हुए हैं कि कैसे करें, क्या करें और कैसे उन्हें नष्ट करें। वास्तव में हमें पता नहीं है कि इसके परिणाम क्या होंगे।’
महर्षि ने कहा कि यूएवी संचालन में कुछ नियमितताएं बरतने के दो पहलू हैं, एहतियातन और सक्षम करना, सरकार इन दोनों पर काम कर रही है। उन्होंने कहा, ‘हमें अवैध चीजों को होने से रोकना होगा। हमें इन्हें (यूएवी को) सक्षम बनाने और इनकी लाइसेंसिंग करने पर भी काम करना होगा।’ गृह सचिव ने कहा कि सरकार रिफाइनरी जैसे बड़े प्रतिष्ठानों की निगरानी, तेल पाइपलाइन से चोरी या तोड़फोड़ रोकने, अपराध का पता लगाने जैसे कामों के लिए भी यूएवी का प्रयोग करने के विकल्प का पता लगा रही है। गृह सुरक्षा का एक सकारात्मक पक्ष है कि आपदा की स्थिति में चाहे राहत भेजना है, दवाएं भेजनी हैं, भोजन की आपूर्ति करनी है, यातायात प्रबंधन हो और अपराध का पता लगाना है। इसलिए गृह सुरक्षा एक मुद्दा है जिस पर हमें गौर करना है। हम गृह मंत्रालय में हैं। गृह सुरक्षा में कुछ बातों को लेकर चिंता है। हम फिलहाल उस पर काम कर रहे हैं। जिसमें पश्चिमी सीमा पर घुसपैठ का मुद्दा शामिल है।
बहरहाल महर्षि ने कहा कि भारत-पाक सीमा के पास घुसपैठ नगण्य स्तर पर पहुंच गई है, जबकि कई क्षेत्र हैं, जिन्हें प्रौद्योगिकी और क्षमता बढ़ाकर सुरक्षित करने की जररूत है। इसमें यूएवी का उपयोग शामिल है। हमारे लिए आवश्यक है कि बल की तैनाती कम की जाए। हम व्यापक तौर पर तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि हम जमीन पर सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें और कर्मियों की संख्या कम रहे। सेमिनार को संबोधित करते हुए एअर मार्शल वीआर चौधरी ने यूएवी और नीची उड़ान भरने वाली सभी वस्तुओं के लिए नियम तय करने की कड़ी वकालत की क्योंकि वे सुरक्षा के लिए खतरा हैं। उन्होंने कहा कि यूएवी सुरक्षा के लिए खतरा हैं। इसका प्रभाव यात्री विमानों पर भी हो सकता है। हमें यूएवी को नियमित करने की जरूरत है। उन्हें कुछ क्षेत्रों में अनुमति दी जानी चाहिए। हम इस तरह की मशीन पर पूर्ण प्रतिबंध की बात नहीं कर रहे हैं। हम कह रहे हैं कि उन्हें नियमित किया जाना चाहिए।
एअर मार्शल चौधरी ने तीन घटनाओं का जिक्र किया जहां यूएवी सुरक्षा के लिए संभावित खतरा बन सकते थे। दिल्ली के आइजीआइ हवाई अड्डे पर 27 अक्तूबर को एक यूएवी का पता लगना, इस वर्ष जनवरी में वॉशिंगटन में वाइट हाउस में एक यूएवी का प्रवेश करना और जर्मनी की चांसलर एंगिला मरकेल जिस हॉल में बोल रही थीं वहां यूएवी का प्रवेश करना। उन्होंने कहा कि कोई भी इंटरनेट पर यूएवी का आॅर्डर कर सकता है। इंटरनेट पर यूएवी आसानी से उपलब्ध हैं। इनका छोटा आकार निश्चित रूप से सुरक्षा के लिए खतरा है। यूएवी का पता लगाया जाना कठिन है, खासतौर से भीड़भाड़ वाले माहौल में उनका पता लगाना कठिन है। उन्होंने कहा कि बहरहाल इसमें नुकसान पहुंचाने की क्षमता है। सबसे छोटा यूएवी भी दो किलोग्राम आरडीएक्स ले जा सकता है।
कोई समझ सकता है कि अगर इससे विस्फोट किया जाए तो एक यूएवी कितना नुकसान कर सकता है। एअर मार्शल चौधरी ने कहा कि वर्तमान में यूएवी पर कोई नियम नहीं है और इसलिए इसके संचालन को पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता। इसका उल्लंघन करने वालों पर भादंसं के तहत कार्रवाई नहीं हो सकती। पूरी दुनिया में कई उदाहरण हैं कि नजर से ओझल होने के कारण या संचालक के नियंत्रण से बाहर जाने के कारण नागर विमानन को काफी क्षति पहुंची है। यूएवी, पैराग्लाइडर्स, हॉट एअर बैलून जैसी गैर पारंपरिक चीजों से होने वाले संभावित खतरे को रोकने के लिए समन्वित प्रयास होना चाहिए।
