सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक जनहित याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई करने पर सहमति जताई। जिसमें जम्मू कश्मीर के अलगाववादियों को देश की संचित निधि से धन कथित रूप से जारी करना अवैध और असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। न्यायमूर्ति एआर दवे और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ ने कहा कि याचिका को सुनवाई के लिए 14 सितंबर को रखा जाए। यह निर्देश उस समय आया जब व्यक्तिगत क्षमता से जनहित याचिका करने वाले वकील एमएल शर्मा ने अदालत के सामने इसका उल्लेख किया।

याचिका में अलगाववादियों को कोष के कथित वितरण की सीबीआइ जांच की मांग की गई। याचिका में कहा गया कि देश के खिलाफ काम करने वाले अलगाववादी समूह को समर्थन देने के लिए अधिकार व वैध अनुमति के बिना देश की संचित निधि से कोष जारी करने को असंवैधानिक, अवैध व भादंसं की धारा 409 के तहत आपराधिक विश्वासघात घोषित किया जाए।

गृह मंत्रालय, जम्मू कश्मीर सरकार और सीबीआइ को इस मामले में पक्षकार बनाने वाली याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि इस मामले में लोक कार्यालय व कोष के दुरूपयोग के लिए भ्रष्टाचार का मामला बनता है। इसमें गृह मंत्रालय और जम्मू कश्मीर सरकार को निर्देश देकर उनसे किसी भी मद के तहत देश की संचित निधि या प्रदेश के राजस्व से किसी भी तरह का कोष जारी नहीं करने के लिए कहने का अनुरोध किया गया। याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि इस संबंध में सीबीआइ को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया जाए।