सीबीआइ के दो शीर्ष अधिकारियों के बीच जंग और उन पर कार्रवाई को लेकर सरकार ने बुधवार को जवाब दिया। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने केंद्र सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि देश की सबसे बड़ी जांच एजंसी की छवि को बचाने के लिए ऐसा करना जरूरी था। सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की सिफारिश के बाद केंद्र ने अधिकारियों को हटाने का फैसला किया है।
सरकार की ओर से वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सीवीसी ने धारा 8 और 41 के तहत सिफारिश की है कि आरोपों की जांच ये दोनों अधिकारी नहीं कर सकते, क्योंकि इन्हीं दोनों पर आरोप हैं। इसके अलावा इनके मातहत एजंसी जांच भी नहीं कर सकती है। जबतक जांच होगी, सीबीआइ की निष्पक्षता के लिए उन्हें छुट्टी पर भेज दिया जाए। यह आदेश अंतरिम होगा। एसआइटी केस की जांच करेगी। उन्होंने कहा कि सीबीआइ की ऐतिहासिक छवि रही है। उसकी ईमानदारी को बनाए रखने के लिए ऐसा करना जरूरी हो गया था। सीवीसी की अनुशंसा पर एक एसआइटी पूरे मामले की जांच करेगी। केंद्र ने यह भी साफ किया अगर अधिकारी निर्दोष साबित होंगे तो उनकी वापसी हो जाएगी।
सरकार के कदम पर विपक्ष के सवाल पर जेटली ने कहा कि क्या दो अधिकारी जो जांच का सामना कर रहे हैं, वो ही अपनी जांच करवाएं? सरकार ने धारा 42 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कार्रवाई की है और अंतरिम निदेशक का आदेश पारित किया है। सीवीसी की अनुशंसा पर सरकार के तुरंत फैसले का जिक्र करते हुए जेटली ने कहा कि हमारी सरकार त्वरित कार्रवाई करती है। जेटली ने कहा कि सीबीआइ में विचित्र और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति पैदा हो गई है। दो बड़े अधिकारी एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। अब इन आरोपों की जांच कौन करेगा? ये सरकार के अधिकार क्षेत्र का मामला नहीं है। सरकार इन मामलों की जांच कर भी नहीं सकती है। ऐसे में निष्पक्ष जांच के लिए सरकार ने सीवीसी की अनुशंसा पर इन अधिकारियों को छुट्टी पर भेज दिया है। उन्होंने कहा कि सीबीआइ ऐक्ट की धारा 41 के तहत सीवीसी के पास जांच का अधिकार है। भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच सीवीसी कर सकता है।

