नीरव मोदी घोटाला मामले में सरकार ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के दो कार्यकारी निदेशकों को बर्खास्त कर दिया है। दोनों पर आरोप है कि वे बैंक के कामकाज पर समुचित निगरानी और नियंत्रण रखने के दायित्व में विफल रहे, जिसकी वजह से 13 हजार करोड़ रुपए से अधिक का साखपत्र घोटाला हो गया।
वित्त मंत्रालय की एक अधिसूचना के अनुसार केवी ब्रह्माजी राव और संजीव शरण को 18 जनवरी को बर्खास्त किया गया। संबंधित आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। राव इसी महीने तो शरण मई में रिटायर होने वाले थे। पंजाब नेशनल बैंक के निदेशक मंडल ने शुक्रवार को मुंबई स्टॉक एक्सचेंज को इन फैसलों की जानकारी भेज दी। अखिल भारतीय बैंक कमर्चारी संघ (एआइबीइए) के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने कहा, ‘हम दो कार्यकारी निदेशकों को बर्खास्त करने की केंद्र सरकार की कार्रवाई का स्वागत करते हैं। इतने बड़े पैमाने पर घोटाला शीर्ष प्रबंधन की जानकारी के बिना नहीं हो सकता था।’
उन्होंने कहा, ‘शायद पहली बार केंद्र सरकार ने राष्ट्रीयकृत बैंकों की प्रबंधन और विविध प्रावधान योजना, 1970 के तहत किसी राष्ट्रीयकृत बैंक के कार्यकारी निदेशकों को हटाया है।’
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, ये अधिकारी स्विफ्ट (सोसायटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन) को बैंक के कोर बैंकिंग समाधान (सीबीएस) से जोड़ने की भारतीय रिजर्व बैंक की सलाह का संज्ञान लेने में विफल रहे। इसको लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 2016 में परिपत्र जारी किया था। कुछ बैंकों ने इसे लागू कर लिया था, जबकि पीएनबी समेत कुछ बैंकों ने इस पर अमल नहीं किया। पीएनबी की कार्यप्रणाली में खामी का लाभ उठाकर आभूषण कारोबारी नीरव मोदी और उसके साथियों ने 13,700 करोड़ रुपए के पीएनबी घोटाले को अंजाम दे दिया। केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार, तीन जुलाई, 2018 को शरण और राव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और पूछा गया था कि पीएनबी के कामकाज पर उचित नियंत्रण रखने में विफल रहने के कारण उन्हें पद से क्यों नहीं हटा दिया जाए। सीबीआइ की जांच के दौरान मिले सबूतों के आधार पर दोनों को बर्खास्त करने की कार्रवाई की गई। वेंकटचलम ने कहा, ‘यह भी अच्छा है कि केंद्र सरकार ने पीएनबी के दो कायर्कारी निदेशकों को बर्खास्त करने से पहले उन्हें अपने विचार रखने का मौका देने की उचित प्रक्रिया का पालन किया।’
गौरतलब है कि पिछले साल अगस्त में नीरव मोदी केस में सरकार ने इलाहाबाद बैंक की प्रमुख रहीं उषा अनंतसुब्रह्मण्यम को नौकरी से हटा दिया था। इलाहाबाद बैंक में जाने से पहले वह पीएनबी में प्रबंध निदेशक (एमडी) और सीईओ के पद पर काम कर रही थीं। सीबीआइ पहले ही इस मामले में आरोपपत्र दायर कर चुकी है। आरोपपत्र में कई कर्मचारियों तथा शीर्ष प्रबंधन के अधिकारियों के नाम हैं। इनमें बैंक के कई पूर्व प्रबंध निदेशक एवं कार्यकारी निदेशक शामिल हैं।
’निदेशकों पर रिजर्व बैंक के परिपत्र पर अमल न करने और बैंक के कामकाज में जिम्मेदारी नहीं निभाने का आरोप

