गौतमबुद्ध नगर जिले में वाहन स्वामियों के बीच अपनी पुरानी गाड़ियों के खास नंबरों को नई गाड़ियों पर लगवाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। खासकर महंगी और लग्जरी गाड़ियों के शौकीन लोग अपने पसंदीदा, लकी या पारंपरिक नंबरों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। परिवहन विभाग के आंकड़े बढ़ते रुझान की पुष्टि कर रहे हैं।

पिछले दो वर्षों में जिले में 500 से अधिक लोगों ने अपने वाहन नंबरों को पोर्ट कराया है। वर्ष 2024 में जहां 214 वाहन स्वामियों ने यह सुविधा ली थी, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 298 तक पहुंच गई। साल दर साल हो रही यह बढ़ोतरी बताती है कि नंबर पोर्ट कराने को लेकर लोगों में रुचि लगातार बढ़ रही है।

यह वह नंबर होते हैं जिनका लोगों के लिए विशेष महत्व होता है। कई लोग धार्मिक या ज्योतिषीय कारणों से अपने लकी नंबर को बनाए रखना चाहते हैं, जबकि कुछ वाहन स्वामी ऐसे भी हैं जिन्होंने नीलामी के जरिए लाखों खर्च कर अपने मनपसंद नंबर खरीदे होते हैं। ऐसे में जब पुरानी गाड़ी बेची जाती है या स्क्रैप कराई जाती है, तब भी वे उसका नंबर नई गाड़ी पर लगवाना पसंद करते हैं।

वाहनों का नंबर

वर्ष 2020 से लागू है ‘नंबर पोर्ट’ की सुविधा

उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2020 में नंबर पोर्ट की सुविधा लागू की थी। इस व्यवस्था के तहत वाहन स्वामी अपनी पुरानी गाड़ी का नंबर अपनी ही नई गाड़ी या परिवार के किसी अन्य वाहन पर स्थानांतरित करा सकता है।