सर्दी के सितम के साथ ही दिल्ली-एनसीआर, खासकर गौतमबुद्धनगर की सड़कों पर मौत का सफेद साया और गहराता जा रहा है। कोहरे से निपटने को लेकर प्रशासन के दावों और कागजी तैयारियों की पोल खोलते हालिया आंकड़े रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। बीते पांच वर्षों के दौरान कोहरे और खराब दृश्यता के कारण हुए सड़क हादसों ने साफ कर दिया है कि प्रशासनिक खामियां और बदहाल सड़कें मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ रही हैं।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 से 2025 तक केवल सर्दियों के तीन महीनों (दिसंबर, जनवरी और फरवरी) के दौरान जिले में कुल 1314 सड़क हादसे दर्ज किए गए। इन हादसों में 546 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 996 लोग गंभीर रूप से घायल होकर जीवन भर का दर्द झेलने को मजबूर हुए हैं। यह स्थिति तब है, जब स्मार्ट सिटी, आधुनिक यातायात प्रणाली और अत्याधुनिक तकनीक के बड़े-बड़े दावे लगातार किए जाते रहे हैं।
90 डिग्री टर्न, साइन बोर्ड की कमी और छोटी रस्सियां…, नोएडा इंजीनियर मौत मामले में अहम खामियां
हैरानी की बात यह है कि हालात सुधरने के बजाय हर साल और भयावह होते जा रहे हैं। साल 2021 में कोहरे के कारण 185 सड़क हादसे हुए थे। 2022 में यह संख्या बढ़कर 273 पहुंच गई, जबकि 2023 में 303 हादसे दर्ज किए गए। वर्ष 2024 में भले ही आंकड़ा मामूली घटकर 266 रहा हो, लेकिन 2025 में एक बार फिर यह बढ़कर 287 तक पहुंच गया। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि वर्ष 2025 में मौतों का आंकड़ा अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इस साल कोहरे से जुड़े हादसों में 123 लोगों की जान गई, जो 2023 के बराबर है। यह आंकड़ा साफ संकेत देता है कि प्रशासन ने बीते हादसों से कोई ठोस सबक नहीं लिया।
घायलों की स्थिति भी कम भयावह नहीं है। पिछले पांच वर्षों में 996 लोग हादसों में घायल हुए हैं। 2021 में जहां 115 लोग घायल हुए थे, वहीं 2023 में यह संख्या बढ़कर 247 हो गई। 2024 और 2025 में भी क्रमश: 212 और 210 लोग घायल हुए। यह दर्शाता है कि फाग लाइट, रिफ्लेक्टर, साइन बोर्ड और सड़क सुरक्षा के अन्य इंतजाम जमीनी स्तर पर पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं। कहीं सड़क डिजाइन में खामियां हैं, तो कहीं संकेतक और चेतावनी व्यवस्था का घोर अभाव।
इन्हीं खतरनाक हालातों के बीच हाल ही में ग्रेटर नोएडा में सामने आया युवराज मेहता का मामला प्रशासन की संवेदनहीनता की एक और दुखद मिसाल बन गया। घने कोहरे के बीच युवराज भी उसी लापरवाही और अव्यवस्था का शिकार हुए, जिसने बीते पांच वर्षों में सैकड़ों घरों के चिराग बुझा दिए।
