उत्तर प्रदेश के हमीरपुर के नौरंगा के रहने वाले मजदूर गोविंद कुमार पिछले दो हफ्तों से अपनी पत्नी पार्वती देवी (49) की तलाश में बेताब हैं। वह 16 दिसंबर को यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए 18 वाहनों के घातक हादसे में लापता हो गई थीं। कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी अपने दो बच्चों प्राची और सागर के साथ बस से नोएडा जा रही थीं, तभी सुबह करीब 4 बजे घने कोहरे के कारण यह दुर्घटना हुई।

कुछ ही मिनटों में, आठ बसों सहित 13 वाहन आग की लपटों में घिर गए। 20 लोग मारे गए। इनमें से कई के शव बुरी तरह जल गए थे और उनकी पहचान करना असंभव था। हालांकि, बच्चे देवी द्वारा धक्का देकर बाहर निकाले जाने के बाद भागने में कामयाब रहे, लेकिन परिवार को इस बात का कोई अंदाजा नहीं है कि देवी का क्या हुआ।

मेरी मां ने सबसे पहले सागर और प्राची को बाहर निकाला- आकाश

इस मामले में जटिलता इसलिए पैदा हो गई है क्योंकि सभी शवों की पहचान हो चुकी है, लेकिन देवी उनमें शामिल नहीं थीं। उनके सबसे बड़े बेटे आकाश ने घटना की भयावहता का वर्णन करते हुए इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “मेरी मां, मेरे छोटे भाई और बहन के साथ मुझसे मिलने आ रही थीं, तभी यह हादसा हुआ। उन्हें चोट लगी। बस में घना धुआं भर गया था, जिससे सांस लेना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने सबसे पहले सागर को बाहर निकाला और फिर प्राची बच निकली।”

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उन्होंने बताया कि उनकी बहन चीख रही थी और कई लोगों से अपनी मां को बचाने में मदद करने की गुहार लगा रही थी, तभी अचानक विस्फोट के बाद बस में आग लग गई। गोविंद और आकाश अब मथुरा के पुलिस थानों और प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, अधिकारियों को यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि देवी उस दुर्भाग्यपूर्ण बस में सवार यात्रियों में से एक थी।

पुलिस से हमें कोई ठोस जानकारी नहीं मिली है- आकाश

आकाश ने बताया कि पुलिस ने परिवार को बताया है कि मामले की जांच चल रही है, लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं दी है। उन्होंने कहा, “उन्होंने हमें चार बार फोन किया और डीएनए जांच के लिए प्राची और मुझसे खून के नमूने, बाल और नाखून के टुकड़े लिए। हमें इन जांचों के नतीजे नहीं पता।” उन्होंने आगे कहा, “दो हफ्ते बाद भी हम लोग लटके हुए हैं। गांव वाले बातें बना रहे हैं। ये सबसे बचने के लिए, सब लोग नोएडा में मेरे पास रह रहे हैं।”

पुलिस ने बताया कि वे इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि देवी बस में यात्रा कर रही थी या नहीं, रिकॉर्ड की जांच करने और ज्यादा जानकारी जुटाने के लिए एक पुलिस अधिकारी को हमीरपुर भी भेजा गया है। आकाश ने बताया कि दो दिन पहले एक सब-इंस्पेक्टर उनके गांव आए और स्थानीय लोगों के बयान दर्ज किए। उन्होंने कहा, “अधिकारी ने मेरे चचेरे भाई जयपाल से भी मुलाकात की, जो मेरी मां और भाई-बहनों को बस में चढ़ाने में मदद करने के लिए उनके साथ आए थे। उन्होंने उन्हें छोड़ने वाले रिक्शा चालक का बयान भी दर्ज किया।”

एएसपी ने क्या बताया?

मथुरा (ग्रामीण) के एएसपी सुरेश चंद्र रावत ने बताया कि पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। उन्होंने कहा, “हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि दुर्घटना के समय देवी वाहन में मौजूद थीं या नहीं। हम सीसीटीवी फुटेज की भी जांच कर रहे हैं।” उन्होंने बताया कि पुलिस कॉल डिटेल रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रही है और बस में यात्रा कर रहे उन यात्रियों के बयान दर्ज कर रही है जो दुर्घटनास्थल से निकलने में कामयाब रहे। रावत ने आगे बताया कि जब पुलिस दुर्घटनास्थल पर पहुंची, तो किसी ने उन्हें यह सूचना नहीं दी कि एक महिला अपने बच्चों को बस से बाहर निकालने में कामयाब हो गई थी, लेकिन वह बस के अंदर फंसी रह गई थी।

मथुरा के जिला मजिस्ट्रेट चंद्र प्रकाश सिंह ने बताया कि इस घटना में 20 लोगों की जान चली गई। उन्होंने आगे बताया कि दुर्घटनास्थल से बरामद सभी शवों की पहचान कर ली गई है और 15 मामलों में डीएनए टेस्ट के जरिये पहचान की गई है। डीएम सिंह ने आगे बताया कि एक दावेदार ने अभी तक शव को अपने कब्जे में नहीं लिया है, जिसकी पहचान हो चुकी है। उन्होंने यह भी बताया कि दो परिवारों ने प्रशासन से संपर्क कर दावा किया है कि उनके परिवार के सदस्यों की इस दुर्घटना में मृत्यु हो गई है, लेकिन उनके शव अभी तक नहीं मिले हैं। सिंह ने कहा, “हम उनके दावों की जांच कर रहे हैं और इन आरोपों की छानबीन कर रहे हैं।”

सरकार ने की थी मुआवजे की घोषणा

परिवार के लिए, इस मामले का कोई समाधान नहीं है। आकाश ने कहा कि प्रशासन द्वारा उनके इस बयान की जांच करने का फैसला कि उनकी मां बस में यात्रा कर रही थीं और दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई। उन्हें ऐसा महसूस कराया जैसे अधिकारियों को संदेह था कि उन्होंने मुआवजे की मांग के लिए झूठा दावा किया है। सरकार ने हर एक मृतक व्यक्ति के परिजनों के लिए 3 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की थी। आकाश ने आगे कहा, “अधिकार जो अस्पताल आए थे बोले थे 72 घंटे में सबकी पहचान हो जाएगी। और अब दो हफ्ते हो गए मेरा कुछ नहीं हुआ।”

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