अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने गुरुवार को दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) प्रशासन से मांग की है कि वह डूसू अध्यक्ष अंकिव बसोया के दस्तावेजों के बारे में खबरों को रोकने के लिए सत्यापन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करें। इसके बाद इससे जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए। एबीवीपी की ओर से कहा गया कि पिछले दो दिनों से परिसर और मीडिया में डूसू अध्यक्ष अंकिव की डिग्री के संबंध में कई अफवाहें फैल रही हैं। इस स्थिति को देखते हुए एबीवीपी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि डीयू को अंकिव के दस्तावेजों को सत्यापित करने का पूरा अधिकार है। विश्वविद्यालय के पास इसके लिए एक प्रक्रिया भी उपलब्ध है।

एबीवीपी की राष्ट्रीय मीडिया संयोजक मोनिका चौधरी ने कहा कि डीयू प्रशासन ऐसे मामलों में शिकायत प्राप्त करने के बाद दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू करता है, प्रशासन के पास ऐसे मामलों के लिए एक व्यवस्थित तरीका है। यदि विश्वविद्यालय प्रशासन सत्यापन की प्रक्रिया शुरू करता है तो एबीवीपी, डीयू प्रशासन को पूरा सहयोग देगी। अंकिव दोषी पाया जाता है तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत दंड दिया जाना चाहिए और यदि अंकिव, इन आरोपों में बरी होते हुए निर्दोष साबित होगा तो जिन्होंने अंकिव पर झूठे आरोप लगाए हैं तथा उसे मानसिक रूप से उत्पीड़ित और बदनाम करने के लिए साजिश रची है, उनको भी कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा।

डीयू अंकिव का प्रवेश रद्द करे : एनएसयूआइ
भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआइ) ने गुरुवार को दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि वह तुरंत प्रभाव से अंकिव बसोया का प्रवेश रद्द करें। एनएसयूआइ ने हाल ही में डूसू अध्यक्ष चुने गए अंकिव पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर डीयू में दाखिला लेने का आरोप लगाया है।

एनएसयूआइ के राष्ट्रीय अध्यक्ष फिरोज खान ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि हम मांग करते हैं कि डीयू प्रशासन तुरंत प्रभाव से अंकिव का दाखिला रद्द करे। इसके अलावा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसे दाखिला देने वाले सभी अधिकारी गिरफ्तार किए जाएं। खान ने कहा कि इसके अलावा डूसू चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे एनएसयूआइ के उम्मीदवार सन्नी छिल्लर को अध्यक्ष घोषित किया जाए। उन्होंने मतपत्र के आधार पर दोबारा डूसू चुनाव कराने की भी मांग की।