दिल्ली के वन और पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने विभिन्न सरकारी महकमों के अफसरों को निर्देश दिए हैं कि वे ठंड के मौसम में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए युद्धस्तर पर तैयारी करें। उन्होंने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार चरणबद्ध तरीके से प्रदूषण पर काबू पाने की योजना को लागू करने पर जोर दिया। दिल्ली सरकार के मंगलवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि वन व पर्यावरण मंत्री हुसैन ने मंगलवार को प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सभी संबंधित अधिकारियों की एक बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुरूप ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान (जीआरएपी) को लागू करना सुनिश्चित करें।
बैठक में तीनों नगर निगमों व नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) को कहा गया कि उनके इलाके में कहीं पर भी निर्माण सामग्री बगैर ढकी हुई नहीं रखी जानी चाहिए। बैठक में निर्माण कार्यों की वजह से होने वाली धूल की समस्या से निपटने पर भी विशेष जोर दिया गया। इस दौरान यह जानकारी भी दी गई कि औद्योगिक इलाकों में रात में कचरा जलाने वालों पर नजर रखने के लिए मार्शल नियुक्त कर दिए गए हैं जो रात में ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाना सुनिश्चित करेंगे। यह प्रदूषण बढ़ने का एक बड़ी वजह है।
सुधरने के बाद फिर बिगड़ी हवा की हालत
दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक ‘बहुत खराब’ स्तर से सुधरने के एक दिन बाद मंगलवार को ‘खराब’ श्रेणी में ही बना रहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने सुबह 11 बजे शहर का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 252 दर्ज किया। मौसम एजंसियों और विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता की स्थिति और बिगड़ सकती है, भलस्वा डलाव घर में आग और कुछ दिनों से तापमान में गिरावट से हवा की गुणवत्ता में और गिरावट की आशंका है। राष्ट्रीय राजधानी की आबोहवा में सोमवार को सुधार के संकेत दिखाई दिए थे और यह ‘बहुत खराब’ से ‘खराब’ की श्रेणी में आ गई थी, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में भलस्वा डलाव घर में आग की वजह से निकलने वाले धुएं से यह स्तर और बिगड़ सकता है।
वहीं निजी मौसम एजंसी स्काईमेट ने कहा है कि फिलहाल एक के बाद एक चक्रवातीय सर्कुलेशन के कारण उत्तर-पछुआ हवाएं ज्यादा समय के लिए नहीं बनी रह पा रही हैं इसलिए पंजाब और हरियाणा में जलाई जा रही पराली का धुंआ दिल्ली नहीं आ पा रहा। स्काईमेट के मुताबिक, यह स्थिति ज्यादा समय तक नहीं रहेगी क्योंकि नवंबर आते ही तापमान में गिरावट आएगी जिससे धुंध व ओस बनेगी और प्रदूषण स्तर में बढ़ोतरी होगी। इसके साथ ही दिवाली के पटाखे भी रही-सही कसर पूरी कर सकते हैं क्योंकि उस दौरान हवा की गति काफी हल्की होती है। एक्यूआइ का स्तर 0 से 50 के बीच ‘अच्छा’ माना जाता है। 51 से 100 के बीच यह ‘संतोषजनक’ स्तर पर होता है और 101 से 200 के बीच इसे ‘मध्यम’ श्रेणी में रखा जाता है। हवा की गुणवत्ता का सूचकांक 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘अत्यंत गंभीर’ स्तर पर माना जाता है।

