पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास 6, फ्लैग स्टाफ रोड को लेकर चल रहा ‘शीशमहल’ विवाद अभी भी थमता नजर नहीं आ रहा है। इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी लगातार तेज बनी हुई है। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान ‘शीशमहल’ से जुड़ी भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट को सदन पटल पर रखने की तैयारी है। इसी बीच मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के एक नए सुझाव ने इस बहस को और हवा दे दी है।

पत्रकारों से बातचीत में मंत्री सिरसा ने ‘शीशमहल’ की साज-सज्जा और निर्माण पर हुए कथित खर्च का जिक्र करते हुए कहा कि इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाना चाहिए। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत राय रखते हुए कहा कि यदि ‘शीशमहल’ में प्रवेश के लिए तीन श्रेणियों में शुल्क तय किया जाए, तो इससे हर महीने करीब पांच लाख रुपये की आय हो सकती है। उनका कहना था कि इस राशि का इस्तेमाल ‘शीशमहल’ के रखरखाव पर किया जा सकता है।

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सिरसा ने प्रस्ताव दिया कि आम लोगों के लिए प्रवेश शुल्क केवल 10 रुपये रखा जाए, जबकि राजनीतिक हस्तियों के लिए 1000 रुपये शुल्क निर्धारित किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया के लिए सबसे अधिक शुल्क होना चाहिए और यदि मीडियाकर्मियों से 10 हजार रुपये भी वसूले जाएं, तो यह अधिक नहीं होगा। मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

हालांकि, सिरसा की इस व्यक्तिगत राय पर सरकार के ही एक अन्य मंत्री प्रवेश वर्मा ने कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी। जब सिरसा ने उनसे यह सुझाव साझा किया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए बात सुनी, लेकिन कोई टिप्पणी करने से बचते रहे। एक सवाल के जवाब में प्रवेश वर्मा ने यह भी कहा कि फिलहाल यह तय नहीं हो पाया है कि ‘शीशमहल’ का उपयोग आवास, संग्रहालय या अतिथि गृह के रूप में किया जाएगा या नहीं।