अपनी दंगा नियंत्रण क्षमताएं बढ़ाने के प्रयास में, दिल्ली पुलिस अमेरिका, चीन और कई यूरोपीय देशों की पुलिस के प्रयोग में आने वाले ‘पेपर बॉल लांचर’ की सेवाएं लेने की प्रक्रिया में है। ‘पेपर बॉल लांचर’ में ऐसे रसायन का पाउडर होता है जो काली मिर्च के स्प्रे की तरह आंखों और नाक में परेशानी उत्पन्न करता है। यह लांचर लक्षित व्यक्तियों पर यह पाउडर गिराता है और जानलेवा नहीं होता है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने इस सप्ताह इस लांचर के लिए पहली निविदा निकाली है। करीब डेढ साल पहले पूर्व पुलिस प्रमुख बीएस बस्सी ने इस हथियार को शामिल करने का विचार दिया था। उन्होंने कहा कि ‘पेपर बाल लांचर’ आंसू गैस के गोले छोड़ने या रबड़ की गोलियां चलाने जैसे पारंपरिक तरीकों से बेहतर रूप से भीड़ को तितर बितर करने में असरदार होता है।

पुलिस पांच मूल तरीकों के ‘पेपर बाल लांचर’ को शामिल करने के प्रयास में है जिसमें कारबाइन एसएक्स और टीएक्स माडल, फ्लैश लांचर, टीएसी 700 और टीएमपी (टेक्टीकल मशीन पिस्टल) शामिल हैं। अधिकारी ने कहा कि वर्ष 2014 में त्रिलोकपुरी दंगों के बाद इसे शामिल करने का विचार आया था और एक निजी कंपनी से ऐसी कुछ गन खरीद कर कुछ विशेष दलों में बांटी गई थी।