बिहार में जैसे ही नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद की और एनडीए के सहयोगी दलों के नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली तो एक नाम को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा सोशल मीडिया, टेलीविजन और लोगों के बीच होने लगी।

यह नाम है दीपक प्रकाश का। दीपक प्रकाश राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं। सवाल यह खड़ा होने लगा कि दीपक प्रकाश ने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा है और वह किसी सदन के सदस्य भी नहीं हैं। ऐसे में उन्हें सीधे ही बिहार सरकार में मंत्री पद की शपथ क्यों दिला दी गई, इसे लेकर तमाम चर्चाएं होने लगी।

बिहार में एनडीए में बीजेपी, जेडीयू, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेकुलर), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा शामिल हैं।

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दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए जाने को लेकर उठ रहे तमाम सवालों के बीच उपेंद्र कुशवाहा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर इसका जवाब दिया है। कुशवाहा ने कहा है कि इसे लेकर तमाम तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुशवाहा ने कहा कि उनके ऊपर परिवारवाद का आरोप लगाया गया है। उन्होंने कहा है कि पार्टी के अस्तित्व और भविष्य को बचाए और बनाए रखने के लिए ऐसा करना बेहद जरूरी था।

जहर पीने के बराबर था फैसला

केंद्र में मंत्री रह चुके कुशवाहा ने कहा है कि उनके फैसले की जितनी आलोचना हो लेकिन हाल फिलहाल में कोई दूसरा विकल्प चुनने की वजह से पार्टी एक बार फिर शून्य तक पहुंच सकती थी। कुशवाहा ने कहा है कि इस फैसले से वह जानते थे कि उनके ऊपर परिवारवाद का आरोप लगेगा और यह फैसला लेना उनके लिए जहर पीने के बराबर था लेकिन फिर भी उन्होंने ऐसा कड़ा और बड़ा फैसला लिया।

कुशवाहा ने शायरी के जरिये भी अपनी बात कही है। उन्होंने कहा-
“सवाल ज़हर का नहीं था, वो तो मैं पी गया। तकलीफ़ उन्हें तो बस इस बात से है कि मैं फिर से जी गया।”

कुशवाहा ने कहा, “दीपक प्रकाश कक्षा में फेल विद्यार्थी नहीं है, उसके पास कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की डिग्री है, संस्कार हैं, उसे थोड़ा वक्त दीजिए, वह अपने को साबित करके दिखाएगा।” अंत में उन्होंने सभी का आभार जताया है।

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विधान परिषद जाएंगे दीपक प्रकाश

एनडीए में जब सीट शेयरिंग का ऐलान हुआ था तो उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को 6 सीटें मिली थी। इसे लेकर कुशवाहा ने नाराजगी जताई थी। तब उनसे वादा किया गया था कि उन्हें एमएलसी की भी एक सीट दी जाएगी। यह तय माना जा रहा है कि दीपक प्रकाश अब विधान परिषद जाएंगे क्योंकि मंत्री बने रहने के लिए 6 महीने के भीतर उन्हें विधानसभा या विधान परिषद में से किसी एक सदन का सदस्य निर्वाचित होना जरूरी होगा।

दीपक प्रकाश कहते हैं कि वह राजनीति में नए नहीं हैं, उन्होंने बचपन से ही राजनीति को समझा है। उपेंद्र कुशवाहा खुद राज्यसभा के सांसद हैं, उनकी पत्नी स्नेहलता विधानसभा का चुनाव जीती हैं।

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