कोरोना वायरस का संक्रमण पूरे देश में बहुत तेजी से फैल रहा है। ऐसे में देश को 3 आई तक के लिए लॉकडाउन कर दिया गया है। इस लॉकडाउन के चलते गरीब तबके के लोग बेहद परेशान हैं और उनके हालात बुरे होते जा रहे हैं। लॉकडाउन के चलते इन लोगों के पास कोई काम नहीं है जिसके चलते खाने और रहने तक के लिए इनके पास पैसे नहीं हैं। मोजो स्टोरी नाम के यूट्यूब चैनल की एक रिपोर्ट के मुताबिक लॉकडाउन में सरकार ने लोगों को राहत के नाम पर जो राशन दिया है वह भी बेहद कम है। एक महीने से ज्यादा का लॉकडाउन हो चुका है और जो राशन दिया गया था वह भी अब खत्म होने वाला है।

वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त ने राजस्थान के ऐसे ही कुछ गरीब लोगों से बात की। जयपुर के सीतपुरा औद्योगिक क्षेत्र में रह रहे एक मजदूर ने बताया कि आज एक महीने से ज्यादा हो गया लॉकडाउन हुए। इतने दिन में सिर्फ 5 किलो आटा, एक किलो चावल, आधा किलो तेल, एक किलो नमक, आधा किलो दाल और एक साबुन मिला है। इसके अलावा हमें दिया क्या है सरकार ने? हमारे काम की तनख्वाह भी नहीं दी। ना ही जहां हम काम करते हैं उन लोगों ने फोन कर के पूछा की हम कहा है कैसे हैं।

शबनम नाम की एक महिला ने कहा “22 तारीख से ये लॉकडाउन हुआ है। हमारे दोनों बच्चे गाँव में हैं। वहां उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं। ससुर मर गए हैं सास हैं। मैं और मेरे पति यहा अकेले फंस गए हैं। मोबाइल में रीचार्ज नहीं होने की वजह से बच्चों से बात भी नहीं हुई। हमारे पास पैसा नहीं है। कहा से सब्जी लाये गैस कैसे भराए।”

महिला ने आगे कहा कि एक किलो चावल दिया है इंसान कितने दिन खाएगा। लॉकडाउन से पहले तनख्वाह देने कि बात कही गई थी लेकिन नहीं मिली। अब ना खाने को पैसे हैं ना मोबाइल रीचार्ज करने को। बच्चों से बात कैसे हो। जब बरखा ने पूछा कि क्या आपको दर नहीं लगता कि आप गाँव अपने घर वापस जाएंगे तो ये कोरोना वायरस अपने साथ ले जाएंगे। इसपर महिला ने कहा “जब होगा तब न किसी को होगा। सरकार रास्ते में जांच कर तो रही है। कम से कम मरने से पहले बच्चे तो देखने को मिलेंगे।