प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर ने अपने पूर्ववर्ती प्रधान न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर का एक फैसला उलटते हुए न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर को फिर से सुप्रीम कोर्ट के ई-पैनल का प्रभारी न्यायाधीश नियुक्त किया है। सरकार ने देश भर की अदालतों में सूचना एवं प्रौद्योगिकी लागू करने और इसके लिए नीति तैयार करने हेतु सुप्रीम कोर्ट के तत्वाधान में 2004 में ई-समिति का गठन किया था। प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर इस समिति के मुख्य संरक्षक हैं और सुप्रीम कोर्ट की अधिसूचना के अनुसार उन्होंने 20 जनवरी को न्यायमूर्ति लोकुर को इसके प्रभारी न्यायाधीश के रूप में बहाल किया है। न्यायमूर्ति लोकुर इस समय सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठता के क्रम में पांचवें वरिष्ठ न्यायाधीश हैं। न्यायमूर्ति लोकुर को नौ नवंबर, 2016 को तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश ठाकुर ने ई समिति के प्रभारी पद से हटा दिया था और उनके स्थान पर राजस्थान हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुनील अंबवानी को यह दायित्व सौंप दिया था। ई समिति के प्रभारी न्यायाधीश के पद से न्यायमूर्ति लोकुर को हटाने की कोई वजह नहीं बताई गई थी।

इस समिति मे न्यायमूर्ति लोकुर के अलावा न्यायमूर्ति एएम खानविलकर, न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड़ और दो अन्य सदस्य हैं। आमंत्रित सदस्यों में अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी और महान्यायवादी रंजीत कुमार, दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति बीडी अहमद भी शामिल हैं। न्यायमूर्ति लोकुर को 2012 में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश एचएस कपाड़िया ने पहली बार इस समिति का प्रभारी न्यायाधीश बनाया था। न्यायमूर्ति लोकुर की देखरेख में ही समिति ने देश में सभी जिला अदालतों के लिए राष्ट्रीय न्यायिक डाटा ग्रिड सफलतापूर्वक शुरू किया था और यह अब हाई कोर्टों के लिए भी इसी तरह के ग्रिड पर काम कर रही है। यह ग्रिड प्रत्येक राज्य की जिला अदालतों में लंबित दीवानी और फौजदारी के मुकदमों का आंकड़ा उपलब्ध कराता है। यही नहीं, यह वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और दूसरे संबंधित आंकड़ों के अलावा दस साल और पांच साल से अधिक समय से लंबित मुकदमों की भी जानकारी देता है।