दिल्ली सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच मचा विवाद अब विधानसभा का रुख करता दिख रहा है। सोमवार को उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सदन को जानकारी दी कि सतर्कता विभाग द्वारा विधायक पंकज पुष्कर के प्रश्नों का पूरा उत्तर देने से इनकार किया गया, जो इस सदन की ही नहीं पूरे देश के सदनों की अवमानना है। मामले को अभूतपूर्व करार देते हुए विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने इसे विशेषाधिाकर समिति को भेज दिया है। प्रश्नकाल के एक अन्य मामले में विधानसभा अध्यक्ष ने दिल्ली सरकार में सचिव मनीषा सक्सेना को मंगलवार को उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के उत्तर के दौरान मौजूद रहने का आदेश जारी किया। विधानसभा अध्यक्ष ने ‘आप’ विधायक पंकज पुष्कर द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर उपलब्ध कराने के लिए मुख्य सचिव अंशु प्रकाश को निर्देश दिया और अधिकारियों को चेतावनी दी कि उनको उन्हें इस हद तक मजबूर नहीं करना चाहिए कि वे 22 मार्च को सदन में पेश होने वाले दिल्ली बजट 2018-19 पर हस्ताक्षर न करें। गोयल ने इस मामले को आगे की कार्रवाई के लिए सदन की विशेषाधिकार समिति के पास भेज दिया है।
बजट सत्र के दूसरे दिन गोयल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के विधायकों ने सदन में नौकरशाहों को निशाना बनाया। विधायक पंकज पुष्कर ने प्रश्नकाल में सवाल उठाया कि सतर्कता विभाग में 1993 से वर्षवार व विभागवार लंबित व निस्तारित मामलों और दोषी पाए गए अधिकारियों के मामलों का विवरण क्या है। इसके जवाब में सिसोदिया ने सदन को बताया कि विभाग से अधिकारियों ने पूरी जानकारी नहीं दी और कारण के रूप में उपराज्यपाल के आदेश और हाई कोर्ट के फैसले का हवाला दिया गया था। सिसोदिया ने कहा कि जो सदन अधिकारियों का वेतन पारित करता है उस सदन को जानकारी क्यों नहीं दी जा सकती। यह इस दिल्ली ही नहीं, पूरे देश के निर्वाचित सदनों का अपमान है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अगर अधिकारी गलत करते हैं तो उसकी जानकारी क्यों नहीं दी जा सकती, यह हाई कोर्ट और उपराज्यपाल के फैसले की गलत व्याख्या है, वह इसे कोर्ट और केंद्र सरकार के संज्ञान में लाएंगे।
इसके बाद विधायक सोमनाथ भारती ने सदन के समक्ष प्रस्ताव रखा कि अधिकारियों की जवाबदेही कैसे तय हो। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह केवल सतर्कता विभाग तक सीमित मामला नहीं है, सेवा शर्तों के हवाले से कुछ भी छुपाया जाता है। उन्होंने सदन में इस मुद्दे पर एक दिन की चर्चा की मांग की। अखिलेश त्रिपाठी ने कहा कि अदालत ने सरकार पर फैसला दिया है, सदन की शक्तियों पर नहीं। विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने कहा कि इस पूरे रवैये से उपमुख्यमंत्री आज जितना गंभीर और पीड़ित दिखे पिछले तीन साल के कार्यकाल में नहीं दिखे। उन्होंने अधिकारियों द्वारा पूरा जवाब नहीं दिए जाने के मामले को अभूतपूर्व बताते हुए कहा, ‘केंद्र की शह पर विधानसभा समितियों की आत्मा को रौंदा जा रहा है, मामले को विशेषाधिकार समिति को दे रहा हूं’। उन्होंने कहा भारत के लोकतंत्र में इतना गंभीर विषय कभी नहीं आया, ऐसा लगता है कि देश में ब्रिटिश शासन है और यहां कोई लोकतंत्र नहीं है।
दिल्ली सरकार के अधिकारी सदन में एक और मुद्दे पर विधायकों के घेरे में आए। गुलाब सिंह ने सवाल किया था कि क्या बच्चों को डांटने पर लगभग 50 लोगों की कथित भीड़ ने बलपूर्वक एक सरकारी स्कूल में घुसकर प्रधानाध्यापक और अध्यापकों के साथ मारपीट की। इस पर मनीष सिसोदिया ने कहा कि ऐसी घटना संज्ञान में नहीं है। लेकिन, विधायकों ने दिल्ली सरकार में सचिव मनीषा सक्सेना द्वारा एक दैनिक समाचारपत्र को दिए साक्षात्कार का हवाला देते हुए पूछा कि क्या अधिकारी इस तरह का ‘गैर जिम्मेदाराना बयान दे सकते हैं’। सिसोदिया ने इसका जवाब मंगलवार को पता कर देने की बात कही जिस पर विधानसभा अध्यक्ष ने मनीषा सक्सेना को उस दौरान वहां मौजूद रहने का आदेश जारी किया। विधानसभा अध्यक्ष ने संकेत दिया कि मामले पर सदन में एक दिन की चर्चा रखी जा सकती है। गौरतलब है कि मुख्य सचिव अंशु प्रकाश पर कथित हमले के बाद से आप सरकार और अधिकारियों के बीच गतिरोध जारी है।
