स्वदेशी आंदोलन में चरखे को लोकप्रिय बनाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से प्रेरित होकर, अरूणाचल प्रदेश के राज्यपाल की पत्नी नीलम मिश्रा ने राज्य के परंपरागत कमर करघा को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया है। इसके लिए उन्होंने पहले खुद बुनाई करना सीखा।अरूणाचल प्रदेश के राज्यपाल ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) बी डी मिश्रा की पत्नी नीलम मिश्रा को यह महसूस हुआ कि यदि इस परंपरागत तकनीक को नहीं संजोया गया तो राज्य के अनोखे परिधान खत्म जाएंगे और यह कला विलुप्त हो जाएगी। इसके बाद उन्होंने यह अभियान शुरू किया।

18 इंच चौड़ाई की पट्टियां बनाई जाती हैः बांस और लकड़ी से बने इस करघे को पीठ का पट्टा भी कहा जाता है। यह बुनाई की एक ऐसी तकनीक है जिसमें पीठ पर पट्टा लपेटा जाता है। इससे अधिकतम 18 इंच चौड़ाई की कपड़े की पट्टियां बनाई जाती है। अधिक चौड़ाई का कपड़ा पाने के लिए इन पट्टियों को एक साथ सिला जाता है।
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पारंपरिक तकनीक पर बनाई गई डॉक्यूमेंट्री फिल्मेंः नीलम मिश्रा ने मीडिया को बताया कि इस पारंपरिक तकनीक और परिधानों को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने इस विषय पर दो डॉक्यूमेंट्री फिल्में बनाने में भी सहयोग किया है। उन्होंने बताया कि पहले के जमाने में महिलाएं अपने परिधान इसी तकनीक से बुन लिया करती थीं लेकिन नई पीढ़ी बाजार से बने बनाए परिधान खरीद लेती है।

प्राकृतिक डाई बनाने में पाई सफलताः उन्होंने कहा कि अरूणाचल प्रदेश की महिलाओं के पास कमर करघा होना चाहिए जिससे वह खुद भी सशक्त होंगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी सुधार आएगा। नीलम ने बताया कि उन्होंने सिंधुरा के पौधे से प्राकृतिक डाई बनाने में भी सफलता पाई है।