तमिलनाडु में सांड़ों को काबू करने वाले खेल जल्लीकट्टू के आयोजन को अनुमति देने वाले प्रदेश विधानसभा द्वारा पारित नए कानून को चुनौती देने वाली भारतीय पशु कल्याण बोर्ड व अन्य पशु अधिकार समूहों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार का सुनवाई करेगा। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाले पीठ से इन याचिकाओं पर जल्दी सुनवाई करने का अनुरोध किया गया था। पीठ ने वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी और आनंद ग्रोवर से कहा कि वे अपने आवेदन दायर करें। छह जनवरी, 2016 को जारी अधिसूचना वापस लेने संबंधी केंद्र की याचिका सहित अदालत 30 जनवरी को इन आवेदनों पर भी सुनवाई करेगी। इस बीच मद्रास हाई कोर्ट ने यहां मरीना बीच पर जल्लीकट्टू समर्थक प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के दौरान पुलिस ज्यादती का आरोप लगाने और सीबीआइ जांच की मांग करने वाली याचिका पर कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में पशु अधिकार समूहों ने अपने आवेदन मेंं कहा है कि जल्लीकट्टू के आयोजन को अनुमति देने के लिए तमिलनाडु विधानसभा में पारित नया कानून सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश को निष्प्रभावी करने का प्रयास है। अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि केंद्र ने तमिलनाडु मेंं जल्लीकट्टू के आयोजन की अनुमति देने वाली छह जनवरी 2016 की अधिसूचना को वापस लेने का फैसला लिया है। अधिसूचना को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह संबंधित पीठ तय करेगी कि केंद्र का आवेदन उसके समक्ष विचार के लिए कब आएगा। मुुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम की ओर से 23 जनवरी कोे लाए गए पशु क्रूरता रोकथाम (तमिलनाडु संशोेधन) अधिनियम, 2017 विधेयक को कुछ देर बहस के बाद सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट के पास करीब 70 कैविएट याचिकाएं आईं, जिनमेंं मांग की गई कि राज्य में जल्लीकट्टू के आयोजन की अनुमति देने वाले नए कानून को चुनौती देने संबंधी याचिकाओं पर जल्द सुनवाई की जाए। अन्नाद्रमुक सरकार इस संबंध मेंं कोई भी फैसला आने से पहले, इस पर त्वरित सुनवाई की मांग को अदालत पहुंची थी जिसके एक दिन बाद बड़ी संख्या मेंं कैविएट याचिकाएं दायर की गईं। चेन्नई: मद्रास हाई कोर्ट ने यहां मरीना बीच पर जल्लीकट्टू समर्थक प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के दौरान पुलिस ज्यादती का आरोप लगाने और सीबीआइ जांच की मांग करने वाली याचिका पर कोई अंतरिम आदेश देने से बुधवार को इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति आर महादेवन ने याचिकाकर्ता की यह दलील अस्वीकार कर दी कि एक अंतरिम आदेश जारी नहीं किए जाने पर पुलिस सारे साक्ष्य नष्ट कर देगी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 30 जनवरी के लिए मुल्तवी कर दी।

यह याचिका मरीना बीच से लगे त्रिपलीकेन इलाके के बी कुमार ने दायर की थी। वहां 23 जनवरी को उस वक्त हिंसक घटनाएं हुई थी जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाना शुरू किया था। वे लोग जल्लीकट्टू के समर्थन में छह दिनों से आंदोलन कर रहे थे। याचिकाकर्ता के वकील के बालू ने दलील दी कि पुलिस की ज्यादती को दिखाने के लिए पर्याप्त चीजें हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने एक आॅटोरिक्शा को आग के हवाले कर दिया, वहां खड़े वाहनों को क्षतिग्रस्त किया और कुछ घरों में घुसकर वहां रखा सामान तोड़ा। उनके पास आरोप के समर्थन में साक्ष्य हैं। उन्होंने दावा किया कि इन घटनाओं से यह साफ जाहिर होता है कि पुलिसकर्मियों ने हिंसा की। याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि वह हिंसक घटनाओं पर नगर पुलिस आयुक्त से एक रिपोर्ट मांगे और सीबीआइ जांच का आदेश दिया जाए। शहर की सत्र अदालत ने हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार 27 लोगों की जमानत मंजूर कर ली। प्रधान सत्र न्यायाधीश नजीर अहमद ने जमानत मंजूर की। याचिकाकर्ता के वकील ने आरोप लगाया है कि इन लोगों के खिलाफ झूठी प्राथमिकी दर्ज की गई थी और वे लोग प्रदर्शन स्थल पर मौजूद नहीं थे।