मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर आम आदमी पार्टी (आप) के विधायकों द्वारा मुख्य सचिव अंशु प्रकाश की कथित पिटाई को लेकर सरकार और नौकरशाही में जारी तकरार के बीच उपराज्यपाल अनिल बैजल ने मुख्यमंत्री को एक पत्र भेजकर उन्हें आत्ममंथन करने की नसीहत दी है। बैजल ने लिखा है कि यह विचार करने का वक्त है कि आज दिल्ली में शासन व्यवस्था को लेकर ऐसे हालात कैसे पैदा हो गए। उपराज्यपाल ने यह भी कहा है कि मुख्य सचिव के साथ हुई घटना से न केवल दिल्ली, बल्कि समूचे देश की नौकरशाही सकते में है। उन्होंने मुख्यमंत्री को यह नसीहत भी दी कि उन्हें सरकार के अफसरों व कर्मचारियों से सीधे बात करनी चाहिए क्योंकि आज ये सभी खुद को पूरी तरह असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति को लेकर हाल ही में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की लिखी गई चिट्ठी का जवाब उपराज्यपाल बैजल ने मुख्यमंत्री केजरीवाल को भेजा है। उन्होंने लिखा है कि मुख्यमंत्री के निवास पर चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा सरकार की नौकरशाही के मुखिया के साथ बदतमीजी व मारपीट की घटना बेहद अप्रत्याशित व दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे समूचे देश की नौकरशाही सकते में है। उन्होंने मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि जब बीते 24 फरवरी को वे राजनिवास में उपराज्यपाल से मिले थे तो उन्होंने हिंसा की घटनाओं की कड़े शब्दों में निंदा की थी और यह भी कहा था कि एक सभ्य व लोकतांत्रिक समाज में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है।
बैजल ने मुख्यमंत्री से कहा है कि उनसे मुलाकात के बाद उन्होंने दिल्ली सरकार के अधिकारियों व कर्मचारियों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की थी। इन अधिकारियों व कर्मचारियों से मुलाकात के बाद उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि ये लोग चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा मारपीट किए जाने की आशंका से ग्रसित हैं। इससे पहले भी कई अफसरों ने उनसे यह शिकायत की कि सरकार के प्रतिनिधि उनसे बेहद खराब बर्ताव करते हैं। उन्होंने लिखा है कि आज समूची नौकरशाही काम करने का एक बेहतर माहौल उपलब्ध कराने के लिए आपकी (मुख्यमंत्री) की ओर देख रही है। अगर उन्हें यह भरोसा नहीं दिलाया गया कि मुख्यमंत्री ऐसा करने में सक्षम हैं तो इससे राजधानी में कानून के शासन के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाएगी। उपराज्यपाल ने स्पष्ट रूप से लिखा है कि चूंकि मुख्य सचिव के साथ मारपीट मुख्यमंत्री के निवास पर और उनकी मौजूदगी में हुई है और उसके बाद ही सरकार व नौकरशाही के बीच अविश्वास का माहौल बना है। लिहाजा, उनका यह फर्ज बनता है कि वे सीधे अफसरों से बात करें। अपने पत्र के अंत में उपराज्यपाल ने अफसोस के साथ लिखा है कि अपने पूरे करियर में उन्होंने सरकार और नौकरशाही के बीच ऐसी स्थिति कभी नहीं देखी।
