पंजाब पुलिस ने अमृतसर में निरंकारी भवन में प्रार्थना सभा के दौरान ग्रेनेड हमले में अलगाववादी संगठनों के कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अमृतसर और भठिंडा जिलों सहित विभिन्न स्थानों पर राज्य पुलिस की विभिन्न टीमों द्वारा छापे मारकर सिख कट्टरपंथी तत्वों को हिरासत में लिया गया। हालांकि, पुलिस ने आधिकारिक तौर न हिरासत की पुष्टि की है और न इनकार किया है। इससे पहले पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सुरेश अरोड़ा ने कहा था कि ग्रेनेड हमले के पीछे ‘स्थानीय’ तत्वों का हाथ हो सकता है।

रविवार को अमृतसर से लगभग 15 किमी दूर राजसांसी इलाके के अदलीवाल गांव में एक धार्मिक सभा में चेहरा ढककर मोटरसाइकिल से आए दो युवक ग्रेनेड फेंककर फरार हो गए थे, इस घटना में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 अन्य घायल हो गए। सभी पीड़ित पास के गांवों के निरंकारी अनुयायी थे, जो साप्ताहिक धार्मिक सभा के लिए एकत्र हुए थे।
पुलिस अधिकारियों ने आईएएनएस को बताया कि अपराधियों को पकड़ने के लिए विभिन्न सुरागों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।

मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने सोमवार को कहा था कि हमले में पाकिस्तान का हाथ मालूम पड़ता है क्योंकि प्रारंभिक जांच में इस बात के संकेत मिले हैं कि इस्तेमाल किया गया ग्रेनेड वैसा ही था जैसा पाकिस्तानी सेना आयुध कारखाने द्वारा बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा था, “सबसे पहले, यह आईएसआई समर्थित खालिस्तान या कश्मीरी आतंकवादी समूहों की भागीदारी के साथ अलगाववादी ताकतों द्वारा एक आतंकवादी कृत्य मालूम पड़ता है।

उन्होंने कहा, “मेरी सरकार ने घटना को गंभीरता से लिया है और पूरी तरह से रूप से जांच के सभी कोणों पर ध्यान दे रही है। उन्होंने हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए उनके बारे में जानकारी देने पर 50 लाख रुपये इनाम के तौर पर देने की भी घोषणा की। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और फोरेंसिक विशेषज्ञ जांच में मदद कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि रविवार की घटना स्पष्ट रूप से आतंकवाद का मामला है और इस घटना के पीछे कोई धार्मिक संबंध नहीं है।