भारत में कोरोनावायरस के केसों के बढ़ने के साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की खामियां तेजी से उजागर होने लगी हैं। इसे लेकर हर तरफ लोगों में गुस्सा है। आलम तो यह है कि सरकारी अफसर भी पीड़ितों की मदद करने के बजाय झुंझलाकर उल्टी-सीधी सलाहें दे रहे हैं। ऐसा ही मामला छत्तीसगढ़ के धमतरी से आया है। यहां एक आइसोलेशन सेंटर में जब मरीजों ने पंचायत सचिव से साबुन और सैनिटाइजर की मांग की, तो उन्होंने अभद्रता करते हुए पेशाब इस्तेमाल करने की सलाह दे दी। इस पर सेंटर पर जमकर हंगामा हुआ।

बताया गया है कि मामला जिले की लटियारा पंचायत का है। यहां आइसोलेशन सेंटर में 6 मरीज रखे गए हैं। पिछले 2 से 3 दिन के बाद उन्हें सफाई के लिए दो साबुन और 50 एमएल सैनिटाइजर की एक बोतल दी गई। इन दोनों के खत्म होने के बाद जब कोरोना से जूझ रहे लोगों ने फोन कर पंचायत सचिव से सैनिटाइजर मुहैया कराने की मांग की, तो वे गुस्से में आ गए और लोगों को अटपटी सलाह देने लगे।

आइसोलेशन सेंटर में रह रहे लोगों की शिकायत है कि सचिव ने गुस्से में आकर पेशाब को डिब्बे में भरकर सैनिटाइजर की तरह इस्तेमाल करने के लिए कह दिया। इसके बाद केंद्र पर हंगामा मच गया। गुस्साए लोगों ने सचिव को जबरदस्त खरी-खोटी सुनाई। इसके बाद सचिव ने अपनी गलती मानते हुए हाथ जोड़कर माफी मांगी। तब यह मामला शांत हुआ।

गुजरातः मां को आती है बेटे की याद, तो चिता पर ही सो जाती है: कहा जाता है कि मां की ममता कभी कम नहीं होती। गुजरात के बनासकांठा से भी ममता का ऐसा ही एक वाकया सामने आया है। यहां जूनीरोह गांव में एक मां अपने बेटे की याद में उसकी चिता वाले स्थान पर ही जाकर सो जाती है। बताया जाता है कि मंगूबेन चौहाण के बेटे महेश का चार महीने पहले एक हादसे में निधन हो गया था। बेटे की मौत से आहत मंगूबेन अब तक इससे सदमे में हैं। जब भी उन्हें बेटे की याद आती है, तो वे अंतिम संस्कार वाली जगह पर पहुंचकर उसकी चिता पर लेट जाती हैं।