समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान सितंबर में ही जेल से रिहा हो गए थे। लेकिन नवंबर में उन्हें फिर से एक मामले में जेल भेज दिया गया।रामपुर की एक स्पेशल एमपी/एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 2019 के दोहरे पैन कार्ड मामले में दोषी ठहराया है। आजम के साथ उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को भी कोर्ट ने जेल भेजा है। इस बीच एक हैरान कर देने वाली खबर आई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट में आजम खान से जुड़े 2016 के यतीमखाना मामले की सुनवाई होने वाली थी, लेकिन जस्टिस समीर जैन ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।
जस्टिस ने लिया फैसला
अधिवक्ता शाश्वत गिरि ने बताया कि सुनवाई के बीच जस्टिस समीर जैन ने यह फैसला लिया। फिलहाल अदालत के रोस्टर के मुताबिक जस्टिस समीर जैन सांसद, विधायकों के खिलाफ मामलों की सुनवाई के लिए अधिकृत हैं। यतीमखाना मामले में पूर्व सांसद मोहम्मद आजम खान और कई अन्य के खिलाफ 12 अलग-अलग एफआईआर दर्ज हैं।
पूर्व में हाई कोर्ट ने 11 जून को अपने आदेश में कहा था कि इस मामले में निचली अदालत में सुनवाई चलेगी, लेकिन कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया जाएगा। हाई कोर्ट ने अपने इस आदेश को अगली सुनवाई तक बरकरार रखने का निर्देश दिया। मामला 15 अक्टूबर, 2016 की कथित घटना से जुड़ा है जिसमें यतीमखाना (वक्फ संख्या 157) नाम से अनाधिकृत ढांचे को ध्वस्त किया गया था। इस मामले में 2019 और 2020 के बीच रामपुर जिले के कोतवाली थाने में 12 एफआईआर दर्ज की गई थीं।
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शुरुआत में इन एफआईआर को लेकर अलग अलग मुकदमे चलाए गए जिन्हें विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए) रामपुर ने आठ अगस्त, 2024 को एक एकल मुकदमे में समेकित कर दिया। मामले में आरोपियों पर आईपीसी के तहत डकैती, घुसपैठ और आपराधिक षड़यंत्र के आरोप लगाए गए।
आजम क्यों जेल में हैं?
दोहरे पैन कार्ड मामले में कोर्ट ने आजम और अब्दुल्ला को दोषी ठहराया है। कोर्ट ने सात साल कैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा दोनों पर 50-50 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है। यह मामला 2019 का है। रामपुर विधायक आकाश सक्सेना ने अब्दुल्ला आजम के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि दो अलग-अलग जन्म प्रमाणपत्रों के आधार पर दो पैन कार्ड बनवाए गए। उन्होंने चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु पूरी न करने के बावजूद विधायक बनने के लिए यह सब किया।
