राजस्थान की एक अदालत में दायर याचिका में दावा किया गया है कि अजमेर में स्थित दरगाह पूर्व में ‘शिव मंदिर’ था। याचिका में दरगाह वाली जगह का सर्वेक्षण कराने का अनुरोध किया गया है।

‘महाराणा प्रताप सेना’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने अजमेर की स्थानीय अदालत में यह याचिका दायर की है।

क्या कहा है याचिका में?

याचिका में दावा किया गया, ‘अजमेर दरगाह पूर्व में शिव मंदिर था और बाद में इसे दरगाह बना दिया गया।’ याचिका में कहा गया है कि इस मामले में राष्ट्रपति को एक याचिका सौंपी गई थी, जिसे राजस्थान के मुख्य सचिव को भेज दिया गया है।

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याचिका में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा सर्वेक्षण कराने का अनुरोध भी किया गया है। सीनियर वकील एपी सिंह ने कहा कि यह याचिका सोमवार को अजमेर में जिला न्यायाधीश की अदालत में दायर की गई है।

एपी सिंह ने याचिका में दावा किया, “दरगाह वाली जगह पर भगवान शिव को समर्पित मंदिर था और यह प्राचीन काल का है।”

हिंदू सेना ने भी दायर की थी याचिका

2024 में हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने भी इसी तरह की याचिका दायर की थी और दावा किया था कि सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह एक मंदिर के ऊपर बनाई गई। उन्होंने दरगाह को हिंदू मंदिर घोषित करने का अनुरोध किया था।

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विष्णु गुप्ता ने अजमेर नगर पालिका के कमिश्नर रहे हरबिलास सारदा के द्वारा 1911 में लिखी किताब का हवाला दिया था। गुप्ता ने कहा था कि इस किताब में दरगाह के मंदिर पर बने होने की बात कही गई है। गुप्ता ने मंदिर में पूजा-पाठ करने की अनुमति देने की मांग की थी।

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की है समाधि

अजमेर शरीफ की दरगाह सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की समाधि है। ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को गरीब नवाज भी कहा जाता है। ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के उर्स पर हजारों की संख्या में लोग दरगाह पर पहुंचते हैं। यहां न सिर्फ भारत से बल्कि दुनिया के कई देशों से लोग आते हैं।

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