गैर सरकारी संगठन सेंटर फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट (सीएचडी) के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नए साल में 1 से 14 जनवरी के बीच कुल 96 लोगों की खुले में सर्दी से मौत हो गई है, जिसमें से 80 फीसद बेघर हैं। सीएचडी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल को पत्र लिखकर सर्द रातों में खुले में सोने को मजबूर ऐसे बेघरों के लिए आश्रय गृह व अन्य सुविधाओं का इंतजाम करने को कहा है। मुख्यमंत्री को संबोधितपत्र में सीएचडी के सुनील कुमार आलेडिया ने एक 45 वर्षीय रिक्सा चालक के मौत की बात लिखी और कहा कि ये आम आदमी नहीं बल्कि ये वो खास आदमी था जिसके लिए भारत के सविंधान में उसके सपनों को साकार करने के नियम कायदे लिखे हुए थे। यही वो गांधी जी का अंतिम व्यक्ति है।
आलेडिया ने लिखा है कि बेघरों को लेकर दिल्ली का शाहजनबाद इलाका यानि दिल्ली-06 (चांदनी चौक, रामलीला मैदान, कश्मीरी गेट, दरियागंज आदि) सबसे संवेदनशील इलाका है। इस क्षेत्र में दिल्ली के कुल 212 आश्रय गृह में से करीब 62 आश्रय गृह हैं। इसमें 6070 लोगों के रहने की सुविधा की गई है, लेकिन इस क्षेत्र में रेहड़ी, रिक्शा चालक व मजदूर वर्ग के लगभग 1 लाख लोगों की आबादी ऐसी है, जो कि खुले में सोने को मजबूर हैं। सीएचडी रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल जनवरी में औसतन 200 बेघरों की मौत सर्दी के कारण होती है। सीएचडी ने मांग की है कि खुले में सो रहे बेघरों के लिए सर्दी में रहने की सुविधा का इंतजाम नजदीकी सब-वे और फ्लाइओवर के नीचे किया जाए। दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड का अन्य विभागों के साथ समन्वय होना चाहिए और बेघर कार्य नीति के लिए अलग विभाग का निर्माण होना चाहिए। 2014 क सर्वेक्षण के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी में 16760 बेघर लोग हैं, जिनके लिए 2019 में कुल 319387 वर्ग मीटर का स्थान है, जबकि जरूरत 879750 वर्ग मीटर की है।
सेक्टर-50 में निर्माणाधीन मेट्रो स्टेशन के पास कार में अंगीठी जलाकर सो रहे ओला चालक की दम घुटने से मौत हो गई। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने बुधवार सुबह कार का शीशा तोड़कर युवक को बाहर निकाला। पुलिस उसे जिला अस्पताल ले गई, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा है। बताया गया है कि जहरीली गैस की वजह से दम घुटने से मौत हुई है। मूलरूप से संभल के रहने वाले सतेंद्र (25) खोड़ा कॉलोनी में किराए पर रहते थे। वे अपनी वैगन आर कार को ओला कैब के रूप में चलाते थे। मंगलवार रात को सेक्टर-50 के मेट्रो स्टेशन के पास कैब में बैठे थे। रात में ठंड लगने पर सतेंद्र ने कार के अंदर ही छोटी अंगीठी में कोयला डालकर जलाया। कार को बंद कर आग तापते हुए उन्हें नींद आ गई। बुधवार सुबह करीब 8 बजे एक राहगीर ने 100 नंबर पर फोन कर सूचना दी। सूचना पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने कार का दरवाजा खोलने की कोशिश की। दरवाजा नहीं खुलने पर शीशा तोड़कर पुलिसकर्मियों ने उन्हें बाहर निकाला। बताया गया है कि सतेंद्र ने कार में एक छोटी अंगीठी रखी हुई थी। ठंड ज्यादा होने पर वे अंगीठी में कोयले रखकर जलाता था। थाना सेक्टर-49 के एसएचओ जीएस त्रिपाठी के मुताबिक, सतेंद्र का बड़ा भाई योगेश दिल्ली केंद्रीय सचिवालय में एक आइएएस का चालक है। मृतक के मोबाइल से मिले नंबर से योगेश को सूचना दी गई। योगेश ने बताया कि सतेंद्र खोड़ा कॉलोनी छोड़कर सर्फाबाद गांव में रहने की तैयारी में था।
