आज के समय में अधिकांश बच्चे मोबाइल, टीवी या खेल पर अपना बहुमूल्य समय बरबाद करते हैं लेकिन अहमदाबाद (गुजरात) की रहने वाली महज 12 साल की ईशा मजीठिया ने रामायण के सुंदरकांड पर आधारित 35 चित्रों की एक श्रृंखला प्रदर्शित कर इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस-2018 में अपना नाम दर्ज कराया है। सुंदरकांड के पांचवें अध्याय में इन 35 चित्रों की मदद से सुंदरकांड की चौपाइयों को दर्शाया गया है। इन चित्रों को कागज पर एक्रिलिक रंग, क्रेयॉन स्याही और चारकोल द्वारा बनाया गया है। यह देश की पहली ऐसी चित्रकारी है जो चित्रों के माध्यम से एक शास्त्र को दर्शाती है। ईशा ने इस विषय पर काम तब शुरू किया, जब वह अक्टूबर, 2012 में महज 6 वर्ष की थी और इसे मार्च, 2016 में पूरा किया। तब वह 10 वर्ष की थी।
उसकी श्रृंखला सितंबर, 2016 में अहमदाबाद में प्रदर्शित की गई थी और इसी दौरान ईशा के काम पर आधारित एक पुस्तक भी रिलीज की गई थी। किशोरी कलाकार की मां प्रिया मजीठिया का कहना है, “इस पुस्तक का उद्देश्य बच्चों को हमारे प्राचीन पवित्र ग्रंथों के प्रचार और संरक्षण में शामिल करना है। इस पुस्तक में प्रिया द्वारा भी संकलित की गई तस्वीरें हैं।
पुस्तक में सुंदरकांड का मूल पाठ है और इसका अनुवाद तीन भाषाओं-गुजराती, हिंदी और अंग्रेजी में किया गया है। ईशा ने उन बच्चों के लिए मिसाल पेश की है जो आज के दौर में मोबाइल और टीवी पर वीडियो गेम खेलते रहते हैं। वहीं ईशा अपने खाली समय में कलाकृति को दर्शाती हैं। कलाकार और भी कई तरह के होते हैं लेकिन ईशा जैसे शायद नहीं।

