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तुलसीदास हनुमान चालीसा में लिख चुके हैं ब्रह्मांड का विज्ञान, NASA से पहले बता दी थी सूर्य और पृथ्वी की दूरी!

Hanuman Chalisa: ‘युग सहस्त्र योजन पर भानु’ केवल भक्ति की पंक्ति नहीं, बल्कि विज्ञान, गणित और ब्रह्मांड की समझ का अद्भुत उदाहरण है। उस समय न तो टेलीस्कोप थे, न उपग्रह, न आधुनिक उपकरण। केवल गणित, ध्यान और ध्यानपूर्वक अवलोकन से प्राचीन भारतीयों ने ब्रह्मांड के इस विशाल पैमाने को समझ लिया था।

By: Archana Keshri
January 14, 2026 19:16 IST
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  • Faith and Science
    1/10

    हनुमान चालीसा, गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित, भारतीय भक्ति साहित्य की अमूल्य धरोहर है। यह केवल भक्ति का पाठ नहीं बल्कि ज्ञान और विज्ञान का अद्भुत संगम भी है। (Photo Source: Pexels)

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    हनुमान चालीसा की रचना 16वीं शताब्दी में गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी, जो भगवान राम के परम भक्त थे और उन्होंने इसे अवधी भाषा में लिखा है। (Photo Source: Freepik)

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    एक लोकप्रिय कथा के अनुसार, यह तब लिखी गई जब तुलसीदास जी मुगल सम्राट अकबर द्वारा जेल में डाले गए थे, और उन्होंने जेल में रहते हुए इसे लिखा। (Photo Source: Pexels)

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    हनुमान चालीसा की एक पंक्ति – “युग सहस्त्र योजन पर भानु”। आज के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह पंक्ति चौंकाने वाला तथ्य प्रकट करती है। (Photo Source: Pexels)

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    प्राचीन मापन और आधुनिक विज्ञान
    इस पंक्ति में सूर्य (भानु) और पृथ्वी के बीच की दूरी का उल्लेख है। यदि इसे गणितीय रूप से देखें: 1 युग = 12,000 वर्ष, सहस्त्र = 1,000, और 1 योजन ≈ 8 मील (1 मील में 1.6 किमी होते हैं)
    (Photo Source: Pexels)

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    तो इस पंक्ति के अनुसार दूरी होगी: 12,000 × 1,000 × 1 योजन ≈ 150 मिलियन किलोमीटर
    (Photo Source: Pexels)

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    ध्यान दें कि NASA और आधुनिक खगोल विज्ञान के अनुसार पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी लगभग 149.6 मिलियन किलोमीटर है। यह संख्या हनुमान चालीसा में लिखी गई पंक्ति के लगभग बराबर है। (Photo Source: Freepik)

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    क्या यह सिर्फ संयोग है?
    कई लोग इसे संयोग मान सकते हैं, लेकिन प्राचीन भारतीय विज्ञान और गणित की गहरी समझ को देखते हुए यह समझना चाहिए कि यह ज्ञान पीढ़ियों से हस्तांतरित हुआ है। उस समय न तो उपग्रह थे, न ही टेलीस्कोप, फिर भी उन्होंने ब्रह्मांड के पैमाने को समझने का प्रयास किया। (Photo Source: Pexels)

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    हनुमान: शक्ति के साथ बुद्धि का प्रतीक
    हनुमान जी केवल अद्भुत शक्ति के प्रतीक नहीं हैं। उनके अद्भुत ज्ञान और समझ का भी उल्लेख मिलता है। इस पंक्ति से यह स्पष्ट होता है कि हमारे प्राचीन ग्रंथों में विज्ञान, गणित और भक्ति का अद्भुत मिश्रण था। (Photo Source: Freepik)

  • 10/10

    प्राचीन भारत का ज्ञान
    गणित और ज्योतिष का गहरा अध्ययन, खगोलशास्त्र में अद्भुत प्रवीणता, प्राकृतिक घटनाओं और अंतरिक्ष की दूरी का अनुमान। इन सभी बातों से यह स्पष्ट होता है कि प्राचीन भारत का ज्ञान केवल आध्यात्मिक नहीं था, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी बहुत उन्नत था। (Photo Source: Pexels)
    (यह भी पढ़ें: श्रीकृष्ण जानते थे अंत, फिर भी क्यों 18 दिनों तक युद्ध को चलने दिया? जानिए इसका कारण)

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