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भारत की संस्कृति और विरासत बेहद समृद्ध, प्राचीन और विविधतापूर्ण है। इसमें धर्म, दर्शन, कला, साहित्य, विज्ञान और जीवन शैली की गहरी परंपराएं शामिल हैं। भारत में कई ऐसे मंदिर हैं जो अपने अंदर गहरा रहस्य समेटे हुए है। इन्हीं में से एक है सोमनाथ मंदिर जो भगवान शिव को समर्पित है। (Photo: Indian Express)
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सोमनाथ मंदिर भारत के सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह सबसे पहला ज्योतिर्लिंग है और यहां दर्शन करने से सभी कष्टों का अंत हो जाता है। यह मंदिर अपने आप में कई रहस्य और चमत्कार समेटे हुए है। आइए जानते हैं इसके बारे में: (Photo: Indian Express)
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गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित सोमनाथ मंदिर दुनिया के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। इतिहासकारों के अनुसार विदेशी आक्रमणकारियों ने इस मंदिर को कई बार लूटा और तोड़ा। कई इतिहासकार 7 बार तो कुछ 17 बार बताते हैं। (Photo: Indian Express)
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1- किसने की थी सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना?
शिव पुराण के अनुसार, एक बार राजा दक्ष प्रजापति ने चंद्र देव को क्षय रोग का श्राप दिया। जिससे उनका तेज क्षीण होने लगा। इससे मुक्ति पाने के लिए चंद्र देव ने सरस्वती नदी के पास एक शिवलिंग की स्थापना कर घोर तपस्या की। उनकी घोर तपस्या से खुश होकर शिव जी ने श्राप से मुक्त कर दिया। इसके बाद चंद्र देव ने भगवान शंकर को यहां ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान रहने की प्रार्थना की जिसे महादेव ने स्वीकार कर लिया। चंद्रदेव का एक नाम सोम भी है, जिसके चलते इस ज्योतिर्लिंग का नाम सोमनाथ पड़ा। (Photo: Indian Express) मंदिर या फिर वृक्षों के चारों ओर परिक्रमा क्यों करते हैं? क्या कहते हैं इसे -
2- समुद्र कभी अपनी सीमा पार नहीं करता
सोमनाथ मंदिर अरब सागर के तट पर स्थित है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि समुद्र के इतना पास होने के बाद भी आज तक मंदिर के गर्भगृह तक पानी नहीं पहुंच सका। भक्त इसे भगवान का चमत्कार कहते हैं। वैज्ञानिक भी आज तक इस रहस्य को सुलझा नहीं पाए। (Photo: Indian Express) -
3- दक्षिण दिशा में जमीन का रहस्य
मंदिर के दक्षिण परिसर में एक बाण स्तंभ है जो छठी शताब्दी से मौजूद है। इसके बारे में किसी को अधिक जानकारी नहीं है। बाण स्तंभ एक दिशादर्शक स्तंभ है जिसके ऊपरी सिरे पर एक तीर बना हुआ है और इसका मुख समुद्र की तरफ है। इस बाण स्तंभ पर ‘आसमुद्रांत दक्षिण ध्रुव पर्यंत अबाधित ज्योतिर्मार्ग’ लिखा हुआ है, जिसका अर्थ है कि यहां से दक्षिण ध्रुव तक सीधी रेखा में कोई भी भूमि बाधा नहीं है। वैज्ञानिक रूप से भी इसे सही माना जाता है क्योंकि, सोमनाथ से दक्षिण दिशा में लगभग 6000 किलोमीटर तक कोई जमीन नहीं मिलती है। (Photo: Indian Express) -
4- मंदिर के द्वारों को लेकर मतभेद
इतिहासकारों के अनुसार महमूद गजनवी ने जब सोमनाथ मंदिर को लूटा था तब उसने मंदिर के चंदन के द्वार अपने साथ गजनी (अफगानिस्तान) ले गया था। वर्ष 1951 में राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रयासों के बाद द्वारा भारत लाया गया। हालांकि, कुछ इतिहासकारों का मानना है कि यह असली द्वारा नहीं है। इसपर कई अलग-अलग मत है। (Photo: Indian Express) -
5- कितनी बार लूटा गया
सोमनाथ मंदिर के विध्वंस को लेकर इतिहासकारों में कई मतभेद हैं। कुछ इतिहासकार मानते हैं कि मंदिर को 7 बार तोड़ा गया। वहीं, कुछ इतिहासकारों का कहना है कि मंदिर को 17 बार लूटा और ध्वस्त किया गया। इस मंदिर को सबसे पहली बार 725 ईस्वी में सिंध के अरब गवर्नर अल-जुनैद ने हमला कर नष्ट किया था और भारी क्षति पहुंचाई थी। (Photo: Indian Express) -
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथों, विद्वानों और इतिहासकारों के संदर्भों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी देना है। जनसत्ता इसकी पुष्टि नहीं करता है। पाठक इसे सामान्य सूचना के रूप में लें। (Photo: Indian Express) 9 महीने में जन्म का रहस्य, इसके बाद या पहले क्यों नहीं होता? गर्भ में आत्मा क्या सीखती है