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धरती पर जीवन का संतुलन इंसान, जानवर और प्रकृति तीनों के सह अस्तित्व (co-existence) से बना है। लेकिन आज हम ऐसे दौर में खड़े हैं, जहां कुछ प्रजातियां इतिहास की किताबों में दर्ज होने से बस एक कदम दूर हैं। यह कोई भविष्य की आशंका नहीं, बल्कि 2026 की कड़वी सच्चाई है। IUCN Red List और World Wildlife Fund (WWF) के ताजा वैज्ञानिक आकलन बताते हैं कि कई जानवर Critically Endangered श्रेणी में पहुंच चुके हैं, यानी उनका अस्तित्व बेहद नाजुक हो चुका है। चलिए जानते हैं इन जानवरों के बारे में।
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नॉर्दर्न व्हाइट राइनो (Northern White Rhino)
संख्या: सिर्फ 2 (दोनों मादा)
धरती पर अब नॉर्दर्न व्हाइट राइनो की केवल दो मादाएं बची हैं। कोई नर जीवित नहीं है। प्राकृतिक प्रजनन अब असंभव है। ये दोनों मादाएं केन्या के ओल पेजेटा कंज़र्वेंसी में सशस्त्र सुरक्षा के बीच रहती हैं। यह प्रजाति तकनीकी रूप से जीवित है, लेकिन व्यवहारिक रूप से विलुप्त हो चुकी है। (Photo Source: Unsplash) -
वाकीता (Vaquita)
संख्या: 10 से भी कम
मेक्सिको की खाड़ी में पाए जाने वाला यह छोटा सा डॉल्फिन जैसा जीव अवैध मछली पकड़ने के जालों का शिकार बन रहा है। एक भी खराब फिशिंग सीजन इसके अस्तित्व को हमेशा के लिए खत्म कर सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अब वाकीता को बचाने के लिए समय लगभग समाप्त हो चुका है। (Photo Source: Pexels) -
रेड वुल्फ (Red Wolf)
संख्या: लगभग 25
एक समय इसे जंगल से पूरी तरह विलुप्त घोषित कर दिया गया था। अब यह अमेरिका के नॉर्थ कैरोलाइना के एक छोटे से इलाके में किसी तरह जिंदा है। हाइब्रिडाइजेशन और मानव संघर्ष इसके अस्तित्व के सबसे बड़े खतरे हैं। (Photo Source: Pexels) -
सुमात्रन राइनो (Sumatran Rhino)
संख्या: 34–47
सुमात्रन राइनों जिन्हें सिंगिंग राइनों भी कहा जाता है, घने जंगलों में इतने अलग-थलग हो चुके हैं कि इन्हें साथी तक नहीं मिल पाता, जिसके कारण इनका प्रजनन करना भी मुश्किव हो गया है। अलगाव इनके अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। कम संख्या और बिखरा हुआ आवास इन्हें विलुप्ति की ओर धकेल रहा है। (Photo Source: Unsplash) -
जावन राइनो (Javan Rhino)
संख्या: लगभग 50
पूरी दुनिया में जावन राइनो सिर्फ एक ही नेशनल पार्क (उजुंग कुलोन, इंडोनेशिया) में पाए जाते हैं। एक ज्वालामुखी विस्फोट या सुनामी इस पूरी प्रजाति को एक झटके में ख त्म कर सकती है। (Photo Source: Pexels) -
अमूर लेपर्ड (Amur Leopard)
संख्या: 80–100
खूबसूरत फर के लिए शिकार और आवास विनाश ने इसे लगभग खत्म कर दिया था। संरक्षण से संख्या थोड़ी बढ़ी है, लेकिन जेनेटिक विविधता बेहद कम होने से भविष्य अब भी खतरे में है। (Photo Source: Pexels) -
क्रॉस रिवर गोरिल्ला (Cross River Gorilla)
संख्या: 200–300
नाइजीरिया और कैमरून की सीमा पर जंगलों की कटाई ने इनके घर छीन लिए हैं, जिसके कारण ये छोटे-छोटे समूहों में बंट गई है। दुनिया का यह सबसे दुर्लभ ग्रेट एप अब भी इंसानी दबाव से जूझ रहा है। (Photo Source: Unsplash) -
साओला (Saola)
संख्या: अज्ञात (100 से कम)
इतना दुर्लभ कि 1992 के बाद किसी बायोलॉजिस्ट ने इसे जंगल में नहीं देखा। संभव है कि यह प्रजाति पूरी तरह विलुप्त हो जाए, इससे पहले कि हम इसे ठीक से समझ भी सकें। (Photo Source: Pexels) -
नॉर्थ अटलांटिक राइट व्हेल (North Atlantic Right Whale)
संख्या: लगभग 340 और मादाएं: 70 से भी कम
जहाजों की टक्कर और मछली पकड़ने की लाइनों में फंसना इनके लिए सबसे बड़ा खतरा है। पूर्वी तट पर इंसानी गतिविधियां इनके अस्तित्व के लिए एक जानलेवा जाल बन चुकी हैं। (Photo Source: Pexels) -
तापनूली ओरंगुटान (Tapanuli Orangutan)
संख्या: 800 से कम
2017 में अलग प्रजाति के रूप में पहचाना गया यह ओरंगुटान सिर्फ एक छोटे से इलाके में रहता है। सोने की खदान और बांध परियोजनाएं इसके आवास को नष्ट कर रही हैं। (Photo Source: Unsplash)
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