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होलिका दहन में गोबर के उपले क्यों जलाए जाते हैं? विज्ञान भी मानता है इसका महत्व

Holika Dahan Tradition: होलिका दहन के पावन अवसर पर कई परंपराएं निभाई जाती हैं, जिनमें से एक महत्वपूर्ण परंपरा गाय के गोबर से बने उपलों (बल्लों) को जलाना है। यह केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरा ज्योतिषीय और वैज्ञानिक कारण भी छिपा है।

By: Archana Keshri
March 10, 2025 13:48 IST
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    होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी है। इस दिन होलिका दहन की परंपरा निभाई जाती है, जिसमें लकड़ियों के साथ-साथ गोबर के उपले (बल्ले) भी जलाए जाते हैं। (Photo Source: Pinterest)

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    खासतौर पर महिलाएं परिवार की नजर उतारकर इन उपलों को होलिका को अर्पित करती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस प्रथा के पीछे क्या कारण है? आइए जानते हैं इस परंपरा का धार्मिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक महत्व। (AI Image generated by ChatGPT)

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    होलिका दहन और गोबर के उपलों का धार्मिक महत्व
    नजर दोष से मुक्ति

    हिंदू धर्म में मान्यता है कि बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए गाय के गोबर का उपयोग किया जाता है। जब महिलाएं परिवार की नजर उतारकर गोबर के उपले जलाती हैं, तो इससे बुरी शक्तियों का नाश होता है और घर में सकारात्मकता आती है। (Photo Source: Pinterest)

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    गाय का गोबर पूजनीय माना जाता है
    हिंदू शास्त्रों के अनुसार, गाय में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए गाय के गोबर को अत्यंत शुभ और शुद्ध माना जाता है। जब होलिका दहन में गोबर के उपले जलाए जाते हैं, तो यह पूरे परिवार के लिए मंगलकारी माना जाता है। (Photo Source: Pinterest)

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    पापों का नाश और सुख-समृद्धि का आगमन
    मान्यता है कि होलिका दहन के दौरान गोबर के उपले जलाने से व्यक्ति के जीवन में मौजूद सभी बाधाएं समाप्त होती हैं। इससे घर-परिवार में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है। (Photo Source: Pinterest)

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    ज्योतिषीय महत्व: क्यों जलाए जाते हैं गोबर के उपले?
    शनि और राहु दोष का निवारण

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गोबर के उपले जलाने से शनि और राहु-केतु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। खासतौर पर जिन लोगों की कुंडली में शनि की साढ़े साती या ढैया चल रही हो, उनके लिए यह उपाय लाभकारी होता है। (Photo Source: Pinterest)

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    नकारात्मक ऊर्जा का नाश
    माना जाता है कि जब गोबर के उपले जलते हैं, तो इससे निकलने वाली ऊर्जा बुरी शक्तियों को समाप्त कर देती है। यही कारण है कि तंत्र-मंत्र में भी गाय के गोबर का विशेष महत्व है। (Photo Source: Pinterest)

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    वास्तु दोष का समाधान
    जिन घरों में वास्तु दोष होता है, वहां होली के दिन गोबर के उपले जलाने से वास्तु दोष का प्रभाव कम हो सकता है। (AI Image generated by Bing)

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    विज्ञान भी मानता है गोबर के उपलों का महत्व
    वातावरण को शुद्ध करता है

    वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो गाय के गोबर में ऐसे प्राकृतिक तत्व होते हैं, जो वातावरण से हानिकारक बैक्टीरिया और विषैले कणों को नष्ट करने में सक्षम होते हैं। जब गोबर जलता है, तो यह हवा को शुद्ध करता है और पर्यावरण के लिए लाभकारी होता है। (Photo Source: Pinterest)

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    स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद
    शोधों के अनुसार, गोबर के उपलों से निकलने वाला धुआं मच्छरों और अन्य हानिकारक कीटाणुओं को दूर भगाता है। इससे हवा में मौजूद हानिकारक तत्व कम होते हैं और श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। (AI Image generated by Bing)

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    कार्बन उत्सर्जन कम करता है
    लकड़ी जलाने की तुलना में गाय के गोबर से कार्बन उत्सर्जन कम होता है, जिससे प्रदूषण भी कम होता है। इसलिए यह पर्यावरण के लिए भी अनुकूल है। (Photo Source: Pinterest)

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    कैसे बनाई जाती है गोबर की माला?
    होली से कुछ दिन पहले महिलाएं छोटे-छोटे उपले (गुलरियां) बनाकर उन्हें धूप में सुखाती हैं। इन उपलों को एक धागे में पिरोकर माला बनाई जाती है। होलिका दहन से पहले इस माला को घर के सदस्यों के ऊपर से घुमाकर नजर उतारी जाती है। इसके बाद इस माला को होलिका की अग्नि में समर्पित कर दिया जाता है। (AI Image generated by Bing)
    (यह भी पढ़ें: Holi 2025: होलिका दहन और होली के मौके पर रंगोली से संवारें अपना घर, यहां से लें यूनिक डिजाइन आइडिया)

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