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भारत को अक्सर एक पितृसत्तात्मक समाज के रूप में देखा जाता है, लेकिन यह पूरी सच्चाई नहीं है। भारत के कई हिस्सों में ऐसी जनजातियां और समुदाय रहे हैं और आज भी हैं जहा वंश, संपत्ति और परिवार की धुरी पुरुष नहीं, बल्कि महिलाएं रही हैं। ये समाज न तो आधुनिक नारीवाद का परिणाम हैं और न ही किसी ‘रोल रिवर्सल’ का प्रयोग, बल्कि सदियों से चली आ रही एक संतुलित सामाजिक व्यवस्था का उदाहरण हैं। (Photo Source: Pexels)
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भारत हमेशा से हर जगह पितृसत्तात्मक नहीं रहा। कई समुदायों में महिलाएं परिवार, संपत्ति और निर्णय-प्रक्रिया के केंद्र में थीं। यह इतिहास हमें याद दिलाता है कि महिला सशक्तिकरण कोई नई अवधारणा नहीं, बल्कि हमारी ही परंपराओं का हिस्सा रहा है। (Photo Source: Pexels)
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खासी समुदाय (Khasi Community)
मेघालय का खासी समाज भारत में मातृवंशीय व्यवस्था का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है। परिवार की संपत्ति सबसे छोटी बेटी (का खादुह) को मिलती है। बच्चे मां का उपनाम अपनाते हैं। विवाह के बाद पति, पत्नी के घर आकर रहता है। यहां महिलाएं न केवल संपत्ति की उत्तराधिकारी होती हैं, बल्कि परिवार की निरंतरता भी उन्हीं से जुड़ी होती है। (Photo Source: Unsplash) -
लेपचा समुदाय (Lepcha Community)
सिक्किम और दार्जिलिंग क्षेत्र में रहने वाला लेपचा समुदाय भी महिलाओं को मजबूत सामाजिक सुरक्षा देता है। अविवाहित बेटियों को परिवार से निकाला नहीं जा सकता, उन्हें पैतृक संपत्ति में बराबर का अधिकार प्राप्त है। महिलाओं को परिवार का स्थायी सदस्य माना जाता है, बोझ नहीं। यह सोच आज भी कई आधुनिक समाजों के लिए सीख है। (Photo Source: Unsplash) -
एझावा समुदाय (Ezhava Community)
केरल का एझावा समुदाय सामाजिक रूप से अपेक्षाकृत प्रगतिशील रहा है। यहां महिलाओं को विवाह में अधिक स्वतंत्रता प्राप्त थी। महिलाओं को तलाक का अधिकार था, तलाक या अलगाव की स्थिति में उन्हें आर्थिक सहायता मिलती थी, और विवाह महिलाओं के लिए आजीवन बंधन नहीं माना जाता था। यह व्यवस्था महिलाओं को आत्मनिर्भर और निर्णय लेने में सक्षम बनाती थी, जो उस दौर में असाधारण मानी जाती थी। (Photo Source: Pexels) -
मिनिकॉय द्वीपवासी (Minicoy Islanders)
लक्षद्वीप के मिनिकॉय द्वीप की सामाजिक व्यवस्था संतुलन का अनूठा उदाहरण है। हर गांव में एक पुरुष मुखिया और एक महिला मुखिया होता है, और दोनों मिलकर गांव के प्रशासन और विवादों का निपटारा करते हैं। यह व्यवस्था बताती है कि सत्ता एकल नहीं, साझी भी हो सकती है और अधिक प्रभावी भी। (Photo Source: Pexels) -
नायर समुदाय (Nair Community)
केरल का नायर समुदाय ऐतिहासिक रूप से मातृसत्तात्मक रहा है। यहां ‘थालिकट्टु कल्याणम’ और ‘संबंधम’ जैसी विवाह प्रथाएं प्रचलित थीं। यहां महिलाएं अपने जीवनसाथी चुनने के लिए स्वतंत्र थीं। विवाह महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा का एकमात्र साधन नहीं था। यहां महिला की पहचान पति से नहीं, अपने परिवार और स्वयं से जुड़ी थी। (Photo Source: Unsplash) -
मप्पिला महिलाएं (Mappila Women)
मलाबार क्षेत्र के मप्पिला मुस्लिम समाज में भी घरेलू स्तर पर महिला नेतृत्व देखने को मिलता है। परिवार की वरिष्ठ महिला घर की मुखिया होती है। आर्थिक फैसलों से लेकर घरेलू प्रबंधन तक, अंतिम निर्णय उसी का होता है। यह दर्शाता है कि धार्मिक पहचान के बावजूद सामाजिक संरचनाएं विविध और लचीली रही हैं। (Photo Source: Pixabay)
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