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नागरिकता संशोधन कानून( Citizenship Ammendment Act) और NRC को लेकर देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर रविवार 22 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी- 'जिन्होंने देश के कई शहरों को अराजकता और डर के माहौल में धकेलने की कोशिश की है, मैं उनसे कहना चाहता हूं- अगर जलाना ही है तो मोदी का पुतला जला लो, लेकिन गरीब का नुकसान तो मत करो। पुलिसवालों पर पत्थर बरसाकर, उन्हें जख्मी करके आपको क्या मिलेगा?'। बता दें कि ये कोई पहला मौका नहीं है जब पीएम मोदी ने अपने संबोधन में खुद को सजा देने जैसी बात कही हो। कभी वह खुद को फांसी पर चढ़ा देने की बात करते दिखे तो कभी गोली मार देने जैसी बात कहते हुए भी देखे जा चुके हैं। आइए डालते हैं ऐसे ही वाकयों पर एक नजर। (All Photos: PTI)
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साल 2016 में नोटबंदी पर अपनी बात रखते हुए पीएम मोदी ने कहा था- 'अगर 30 दिसंबर (50 दिन पूरा होने पर) के बाद कोई कमी रह जाए, कोई मेरी गलती निकल जाए, कोई मेरा गलत इरादा निकल जाए। आप जिस चौराहे पर मुझे खड़ा करेंगे, मैं खड़ा होकर.. देश जो सजा देगा वो भुगतने को तैयार हूं।'
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साल 2017 में कथित तौर पर गोरक्षकों द्वारा दलितों पर हमले पर बयान देते हुए पीएम ने कहा था कि दलितों पर हमले बंद करें, अगर गोली मारनी है तो मुझे गोली मारिए।

तब प्रधानमंत्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था- 'गौरक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों से कहना चाहता हूं कि अगर आपको कोई समस्या है, अगर आपको हमला करना तो मुझ पर हमला करिए। मेरे दलित भाइयों पर हमला बंद करिए। अगर आपको गोली मारनी है तो मुझे गोली मारिए, लेकिन मेरे दलित भाइयों को नहीं। यह खेल बंद होना चाहिए।' -
साल 2014 में बतौर पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने गुजरात दंगों के लिए माफी मांगने से जुड़े सवाल पर कहा था- ‘अगर इन आरोपों में रत्ती भर भी सच्चाई है तो मैं महसूस करता हूं कि भारत के उज्ज्वल भविष्य और परंपरा के लिए मोदी को चौराहे पर फांसी पर चढ़ा देना चाहिए। सजा ऐसी होनी चाहिए कि आने वाले 100 बरस में किसी को ऐसा अपराध करने का साहस न हो।'