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जस्टिस सूर्य कांत ने सोमवार, 24 नवंबर, 2025 को राष्ट्रपति भवन में देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। (PTI Photo)
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शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल समेत कई कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ गणमान्य मौजूद रहे। (PTI Photo)
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शपथ के बाद जस्टिस कांत ने अपने माता-पिता का आशीर्वाद लिया। उन्होंने हिंदी में शपथ लेकर न्यायपालिका में भारतीय भाषाओं और भारतीयता की भूमिका को एक बार फिर रेखांकित किया। (PTI Photo)
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हाल ही में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस सूर्य कांत और उनके पूर्ववर्ती जस्टिस बी.आर. गवई की “इंडियननेस” की तारीफ़ करते हुए कहा था कि दोनों जज अपने फैसलों में विदेशी मिसालों पर नहीं, बल्कि भारतीय न्यायिक विरासत और सिद्धांतों पर भरोसा करते हैं। (Express Photo by Renuka Puri)
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शपथ समारोह के बाद जस्टिस गवई ने औपचारिक सौहार्द का परिचय देते हुए मुख्य न्यायाधीश के लिए निर्धारित आधिकारिक वाहन अपने उत्तराधिकारी, जस्टिस कांत, के लिए आरक्षित कर दिया। इसी वाहन से वे बतौर CJI पहली बार सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। (Express Photo by Renuka Puri)
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जस्टिस कांत एक ऐसे जज के रूप में जाने जाते हैं, जो टकराव से अधिक विवादों को नरमी और बातचीत के जरिए हल कराने में विश्वास रखते हैं। यही वजह थी कि किसानों के आंदोलन के दौरान उन्होंने किसानों और केंद्र सरकार—दोनों को वार्ता की मेज पर लाने में अहम भूमिका निभाई थी। उम्मीद जताई जा रही है कि अपने कार्यकाल में भी वे विवादों को बातचीत, मध्यस्थता और समझदारी से सुलझाने पर जोर देंगे। (Express Photo by Renuka Puri)
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SIR मामले पर रहेगी देश की नजर
जस्टिस कांत के कार्यकाल में सबसे जटिल मामलों में से एक है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR), जिसकी दूसरी फेज़ अब 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 51 करोड़ से अधिक लोगों को कवर कर रही है। अब तक उनकी बेंच ने प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है, लेकिन मुख्य सवाल—इस प्रक्रिया की संवैधानिकता—पर फैसला बाकी है। पूरे देश की निगाहें इस मामले में CJI कांत के रुख पर टिकी रहेंगी। (Express Photo by Renuka Puri) -
ह्यूमर और असभ्य भाषा पर स्पष्ट रुख
हाल ही में यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया के एक विवादित बयान पर सुनवाई के दौरान जस्टिस कांत ने कहा था— “ह्यूमर वह कला है जिसे पूरा परिवार बिना शर्मिंदगी के देख सके। गंदी भाषा प्रतिभा नहीं है।” इसी तरह, उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर पर अकादमिक अली खान महमूदाबाद की पोस्ट्स की समीक्षा के लिए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल गठित किया था। (Express Photo by Renuka Puri) -
कई ऐतिहासिक फैसलों का हिस्सा
जस्टिस सूर्य कांत कई बड़े मामलों में महत्वपूर्ण बेंचों का हिस्सा रहे हैं। इनमें आर्टिकल 370 हटाने का ऐतिहासिक फैसला, इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को असंवैधानिक घोषित करना, पेगासस जासूसी मामले की सुनवाई, यूएपीए/राजद्रोह कानून पर रोक की कार्यवाही, लखीमपुर खीरी हिंसा केस में आशीष मिश्रा को सशर्त अंतरिम जमानत देने जैसे फैसले शामिल हैं। (Express Photo by Renuka Puri)
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