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राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के दो बेहद करीबी साथी और युवा कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने चंद महीनों के अंतराल पर ही पार्टी से किनारा कर लिया। सिंधिया और पायलट दोनों के बारे में कहा जाता था कि ये लोग कभी भी बिना अपॉइंटमेंट सीधे कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से मिलने पहुंच सकते थे। राहुल गांधी अपने इतने करीबियों को भी पार्टी में नहीं रोक पाए। हालांकि जवाहर लाल नेहरू के समय़ से ही कांग्रेस से नामी नेता अलग हुए लेकिन कांग्रेस की हालत पहले ऐसी कभी ना थी जो अब है। (Photos: Social Media)
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पंडित जवाहर लाल नेहरू शिद्दत से चाहते थे कि जय प्रकाश नारायण उनके बाद कांग्रेस की कमान संभालें। हालांकि जेपी ने नेहरू को समाजवाद पर खरा ना पाते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।
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सी राज गोपालाचारी ने नेहरू को कुछ ज्यादा ही समाजवादी करार देते हुए पार्टी छोड़ दी थी।
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आचार्य नरेंद्र देव और अशोक मेहता जो नेहरू के काफी करीबी थे उन्होंने भी सैद्धांतिक मतभेद का हवाला देते हुए पार्टी से किनारा कर लिया था।
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जब कांग्रेस की कमान इंदिरा गांधी के हाथों में थी तब युवा तुर्क के नाम से मशहूर चंद्रशेखर जैसे दिग्गज नेता ने पार्टी छोड़ दी थी। उन्होंने इंदिरा पर आरोप लगाया था कि अब वह पहले जैसी करिश्माई नहीं रह गई हैं। चंद्रशेखर ने इंदिरा गांधी औऱ कांग्रेस की धर्मनिरपेक्षता पर भी सवाल उठाए थे।
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राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कंग्रेस से उनके भतीजे अरुण नेहरू ने ही पार्टी से किनारा कर लिया था। अरुण नेहरू के साथ ही राजीव गांधी के खास वी पी सिंह भी पार्टी से अलग हो गए। इन लोगों ने जन मोर्चा नाम से अलग दल बनाया था।
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1 जनवरी 1996 को माधवराव सिंधिया को तत्कालीन सरकार में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। उनका नाम जैन-हवाला डायरी में आया था। इस कारण अगले लोकसभा चुनाव में टिकट भी नहीं दिया। नाराज माधव राव ने अपनी अलग पार्टी बना ली थी। हालांकि वह ज्यादा दिन कांग्रेस से दूर नहीं रह पाए थे।
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राजीव गांधी की हत्या के बादसचिन पायलट के पिता राजेश पायलट ने भी कांग्रेस में अपने बगावती तेवर दिखाए थे। 1997 में राजेश पायलट ने सीताराम केसरी के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ अपनी मनसा जाहिर कर दी थी। इसके बाद नवंबर 2000 में जब बागी नेता जितेंद्र प्रसाद ने कांग्रेस अध्यक्ष पद पर सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा तो राजेश पायलट ने जितेंद्र प्रसाद का साथ दिया था।