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भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने 27 वर्षों की असाधारण सेवा के बाद नासा (NASA) से सक्रिय अंतरिक्ष उड़ान से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है। तीन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) मिशनों, 608 दिनों के अंतरिक्ष प्रवास और रिकॉर्ड तोड़ स्पेसवॉक के साथ सुनीता विलियम्स ने मानव अंतरिक्ष उड़ान के इतिहास में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। (Photo Source: NASA)
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नासा के चीफ जैरेड आइजैकमैन ने सुनीता विलियम्स को ‘ट्रेलब्लेजर’ बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर उनके नेतृत्व ने न केवल भविष्य के मानव मिशनों को दिशा दी, बल्कि लो अर्थ ऑर्बिट में कमर्शियल स्पेसफ्लाइट के नए युग को भी आकार दिया। वहीं, खुद सुनीता ने अंतरिक्ष को अपनी ‘सबसे पसंदीदा जगह’ बताया। (Photo Source: NASA)
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स्पेस शटल से स्टारलाइनर तक का सफर
सुनीता विलियम्स ने पहली बार 2006 में स्पेस शटल डिस्कवरी के जरिये अंतरिक्ष की उड़ान भरी। इसके बाद उन्होंने अटलांटिस शटल से भी यात्रा की। वह ISS अभियानों 14 और 15 में फ्लाइट इंजीनियर रहीं और उस दौरान चार स्पेसवॉक पूरे किए, जो उस समय किसी महिला अंतरिक्ष यात्री द्वारा किया गया रिकॉर्ड था। वर्ष 2012 में वह फिर से ISS पहुंचीं, जहां उन्होंने अभियानों 32 और 33 में भाग लिया और स्पेस स्टेशन की कमांडर भी बनीं। (Photo Source: NASA) -
उनका सबसे हालिया मिशन जून 2024 में बोइंग के स्टारलाइनर यान के साथ था, जो इस अंतरिक्ष यान की पहली मानवयुक्त परीक्षण उड़ान थी। तकनीकी चुनौतियों के बावजूद, इस मिशन ने सुनीता विलियम्स के अनुभव और धैर्य को एक बार फिर साबित किया। (Photo Source: NASA)
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शुरुआती जीवन और शिक्षा
सुनीता विलियम्स का जन्म ओहायो के यूक्लिड शहर में हुआ था। उनके पिता डॉ. दीपक पंड्या और मां बोनी पंड्या हैं। हालांकि जन्म ओहायो में हुआ, लेकिन मैसाचुसेट्स के नीडहैम शहर को वह अपना असली घर मानती हैं। (Photo Source: NASA) -
उन्होंने 1983 में नीडहम हाई स्कूल से पढ़ाई पूरी की और 1987 में यूनाइटेड स्टेट्स नेवल अकादमी से फिजिकल साइंस में स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद 1995 में उन्होंने फ्लोरिडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री पूरी की। (Photo Source: NASA)
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नौसेना से अंतरिक्ष तक का सफर
मई 1987 में सुनीता विलियम्स को अमेरिकी नौसेना में एनसाइन के रूप में कमीशन मिला। उन्होंने नेवल एविएटर के रूप में प्रशिक्षण लिया और 1989 में आधिकारिक तौर पर पायलट बनीं। उन्होंने भूमध्य सागर, रेड सी और फारस की खाड़ी में कई अभियानों में भाग लिया, जिनमें डेजर्ट शील्ड जैसे ऑपरेशन शामिल थे। (Photo Source: NASA) -
टेस्ट पायलट स्कूल से प्रशिक्षण के बाद उन्होंने 30 से अधिक प्रकार के विमानों में 3,000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव हासिल किया। इस अनुभव ने बाद में उन्हें नासा के सबसे भरोसेमंद अंतरिक्ष यात्रियों में से एक बनने में मदद की। (Photo Source: NASA)
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नासा में चयन और प्रशिक्षण
1998 में नासा ने सुनीता विलियम्स को अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने स्पेस शटल और आईएसएस सिस्टम्स, टी-38 जेट उड़ान, रोबोटिक्स और कठिन परिस्थितियों में सर्वाइवल ट्रेनिंग हासिल की। उन्होंने रूस में भी काम किया और नासा के रोबोटिक्स विभाग में महत्वपूर्ण योगदान दिया। (Photo Source: NASA) -
अंतरिक्ष में नेतृत्व और रिकॉर्ड
2006 से 2007 के बीच अपने पहले मिशन में उन्होंने कुल 29 घंटे 17 मिनट की स्पेसवॉक की। 2012 के मिशन में वह आईएसएस की कमांडर बनीं और महत्वपूर्ण मरम्मत अभियानों का नेतृत्व किया। 2025 में SpaceX Dragon से पृथ्वी लौटने से पहले, सुनीता विलियम्स ने एक और इतिहास रचा। (Photo Source: @Astro_Suni/X) -
उन्होंने कुल 62 घंटे 6 मिनट के स्पेसवॉक के साथ पैगी व्हिटसन का रिकॉर्ड तोड़ते हुए सबसे ज्यादा स्पेसवॉक करने वाली महिला अंतरिक्ष यात्री बनने का गौरव हासिल किया। वह नासा की ऑल-टाइम लिस्ट में चौथे स्थान पर रहीं। (Photo Source: @Astro_Suni/X)
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संन्यास और विरासत
सुनीता विलियम्स को उनके करियर में डिफेंस सुपीरियर सर्विस मेडल, लीजन ऑफ मेरिट, नेवी कमेंडेशन मेडल, और ह्यूमैनिटेरियन सर्विस मेडल जैसे कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले। उन्होंने 27 दिसंबर 2025 को नासा और सक्रिय अंतरिक्ष सेवा से संन्यास लेकर एक गौरवशाली अध्याय को विराम दिया है। हालांकि, संन्यास के बाद भी वह मेंटोरिंग, पब्लिक आउटरीच और सलाहकार भूमिकाओं के जरिए स्पेस और एविएशन कम्युनिटी से जुड़ी रहेंगी। (Photo Source: NASA)
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