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आज की तेज रफ्तार जिंदगी में आलस्य (Laziness) को अक्सर कमजोरी या इच्छाशक्ति की कमी मान लिया जाता है। लेकिन जापान में इसे बिल्कुल अलग नजरिए से देखा जाता है। वहां आलस्य को एक मानसिक-शारीरिक स्थिति माना जाता है, न कि चरित्र की खामी। (Photo Source: Pexels)
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जापानी सोच के अनुसार, इंसान तब ‘आलसी’ महसूस करता है जब वह बिना किसी सिस्टम के काम करने की कोशिश करता है। अगर आप भी बार-बार थकान, टालमटोल या मन न लगने की समस्या से जूझते हैं, तो यह लेख आपके लिए है। (Photo Source: Pexels)
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आलस्य नहीं, सिस्टम की कमी है समस्या
जापान में लोग आलस्य से लड़ने के लिए खुद को मोटिवेट नहीं करते, बल्कि छोटे-छोटे तरीकों (methods) को अपनाते हैं। वहां माना जाता है छोटा शुरू करो, हल्का खाओ, फोकस के साथ काम करो, आसपास का माहौल साफ रखो, परफेक्ट नहीं, पूरा करो, और मन तैयार होने से पहले एक्शन लो। इसी वजह से वहां Consistency असाधारण नहीं, बल्कि सामान्य बात है। (Photo Source: Pexels) -
जापान के 7 तरीके, जो आलस्य को आदत में बदल देते हैं
KAIZEN – वन-मिनट रूल
Kaizen का मतलब है छोटे लेकिन लगातार सुधार। जापान में कहा जाता है- इतना छोटा काम शुरू करो कि दिमाग मना ही न कर पाए। जैसे: एक पुश-अप, एक लाइन लिखना, एक मिनट पढ़ना। रिसर्च बताती है कि छोटी आदतें मानसिक रुकावट को पार कर जाती हैं और समय के साथ बड़ा असर डालती हैं। क्योंकि दबाव नहीं, प्रगति जरूरी है। (Photo Source: Pexels) -
IKIGAI – जीने की वजह
सवाल यह नहीं कि ‘आप क्या करते हैं’, सवाल यह है कि ‘आप उठते क्यों हैं?’ जापान में उद्देश्य (Purpose) को ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है। रिसर्च बताती है कि जिन लोगों के जीवन में अर्थ होता है, उनमें एनर्जी ज्यादा होती है, और डिसिप्लिन अपने आप आता है। जब ‘क्यों’ का उत्तर साफ हो जाता है, तो मेहनत बोझ नहीं लगती। (Photo Source: Pexels) -
HARA HACHI BU – 80% पर रुकना
जापानी लोग पूरा पेट भरने से पहले खाना बंद कर देते हैं। ज्यादा खाना शरीर को सुस्त बना देता है, जिससे फोकस और मूड दोनों बिगड़ते हैं। हल्का पाचन यानी बेहतर ऊर्जा के साथ साफ दिमाग। कई बार आलस्य असल में शारीरिक ओवरलोड होता है। (Photo Source: Pexels) -
Anchored Focus – रिचुअल के साथ काम
25 मिनट काम, 5 मिनट ब्रेक। इसके साथ एक छोटा रिचुअल जोड़ें, जैसे- एक गहरी सांस, कोई खास म्यूजिक, या कोई इशारा। न्यूरोसाइंस के मुताबिक, यह ब्रेन कंडीशनिंग है। इससे दिमाग सीख जाता है कि यह सिग्नल है अब फोकस करना है। (Photo Source: Pexels) -
Seiri & Seiton – जगह साफ, दिमाग साफ
बिखरा हुआ कमरा मानसिक शोर पैदा करता है। प्रिंसटन यूनिवर्सिटी की रिसर्च बताती है कि अव्यवस्था तनाव बढ़ाती है और ध्यान घटाती है। वहीं साफ जगह, साफ एक्शन को जन्म देती है। (Photo Source: Pexels) -
Kintsugi – अधूरा नहीं, आगे बढ़ो
Kintsugi एक जापानी कला है जिसमें टूटे बर्तन को सोने से जोड़ा जाता है। अक्सर आलस्य के पीछे फेल होने का डर छुपा होता है। किंत्सुगी की कला सिखाती है खामियां गलती नहीं, सफर का हिस्सा हैं। परफेक्ट नहीं, कम्प्लीट होना जरूरी है। कम्प्लीशन से ही मोमेंटम बनता है। (Photo Source: Pexels) -
Wabi-Sabi – परफेक्ट से पहले एक्शन
जापानी सोच में परफेक्ट कंडीशन का इंतजार नहीं किया जाता। जो है, उसी से शुरू किया जाता है। क्योंकि परफेक्शन एक्शन को टालता है, जबकि एक्शन यानी कोई मूवमेंट ही क्लैरिटी लाता है। कई बार टालमटोल, धैर्य नहीं बल्कि डर होता है। (Photo Source: Pexels) -
असली बदलाव: काम को ट्रैक करना
जापान में माना जाता है सिर्फ अवेयरनेस से आदतें नहीं बदलतीं, Tracking बदलती है। जो आप रोज ट्रेक करते हैं, वही दोहराते हैं। जो दोहराते हैं, वही आपकी पहचान बन जाता है। दिखता हुआ प्रोग्रेस ही कंसिस्टेंसी बनाता है। क्लैरिटी के लिए स्ट्रक्चर जरूरी है। (Photo Source: Pexels)
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