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आजकल ज्यादातर लोग केमिकल बेस्ड टूथपेस्ट का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें मौजूद तत्व कई बार मसूड़ों की कमजोरी, सेंसिटिव और बदबू जैसी समस्याएं बढ़ा देते हैं। ऐसे में प्राचीन आयुर्वेदिक विधि से तैयार किया गया आयुर्वेदिक टूथ पाउडर आपके ओरल हेल्थ को नेचुरल तरीके से मजबूत बनाता है। (Photo Source: Unsplash)
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यह मुखरोग चिकित्सा पर आधारित एक ट्रेडिशनल नुस्खा है, जिसमें नीम, त्रिफला, हल्दी, लौंग, सेंधा नमक और फिटकरी जैसे गुणकारी तत्व शामिल हैं। यह पाउडर न सिर्फ दांत साफ करता है, बल्कि मसूड़ों को मजबूत करने, सांसों को ताजा रखने और मुंह को बैक्टीरिया रहित बनाने में मदद करता है। (Photo Source: Pexels)
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आयुर्वेदिक टूथ पाउडर में क्या-क्या होता है? (मुख्य सामग्री)
प्राकृतिक गुणों से भरपूर ये तत्व इसे बेहद प्रभावी बनाते हैं:
नीम- नीम प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल है जो प्लाक बनने से रोकता है और दांतों को कैविटी से बचाता है। (Photo Source: Pexels) -
त्रिफला- त्रिफला मसूड़ों की कमजोरी और माउथ अल्सर में राहत देता है और ओरल हेल्थ को संतुलित रखता है। (Photo Source: Freepik)
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हल्दी- हल्दी एंटी-इंफ्लेमेटरी है, जो मसूड़ों की सूजन और पायरिया को कम करती है। (Photo Source: Pexels)
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लौंग- लौंग का तेल दांत दर्द में आराम देता है और मुंह की दुर्गंध को दूर करता है। (Photo Source: Pexels)
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सेंधा नमक- यह दांतों की सफाई करता है और हल्का-सा व्हाइटनिंग इफेक्ट भी देता है। (Photo Source: Pexels)
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फिटकरी- फिटकरी मसूड़ों की ढीलापन कम करती है और ब्लीडिंग को कंट्रोल करती है। (Photo Source: Freepik)
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पुदीना (ऑप्शनल)- मुंह में ठंडक और ताजगी लाता है।
सभी सामग्रियों को अच्छे से पीसकर फाइन पाउडर बना लें। इसे एक एयरटाइट कंटेनर में भरकर रखें। (Photo Source: Pexels) -
कैसे करें इस्तेमाल?
आयुर्वेदिक टूथ पाउडर का सही इस्तेमाल इसके फायदे को और बढ़ा देता है। ¼–½ चम्मच टूथ पाउडर लें। इसमें 3–4 बूंद तिल का तेल (Sesame Oil) मिलाएं। उंगलियों या मुलायम ब्रश से 1–2 मिनट हल्के हाथों से मसूड़ों व दांतों पर मसाज करें। इसके बाद गुनगुने पानी से कुल्ला कर लें। (Photo Source: Freepik) -
आयुर्वेदिक टूथ पाउडर के फायदे
नेचुरल तरीके से दांतों की सफाई, मसूड़ों को मजबूत बनाना, खून आना कम होना, सांसों की बदबू दूर, दांतों का सौम्य (जेंटल) व्हाइटनिंग प्रभाव, मुंह के माइक्रोबायोम को बैलेंस करता है, और छोटे-मोटे माउथ अल्सर को ठीक करने में मदद करता है। (Photo Source: Unsplash) -
सावधानियां
यदि मसूड़े बहुत संवेदनशील हों या इनेमल पतला हो तो अधिक मात्रा में न इस्तेमाल करें। जलन या परेशानी होने पर इसका उपयोग 2–3 बार प्रति सप्ताह कर दें। 5 साल से कम उम्र के बच्चों को डॉक्टर की सलाह या सुपरविजन के बिना न दें। (Photo Source: Pexels) -
नोट
यह एक आयुर्वेदिक घरेलू नुस्खा है जो सामान्य ओरल वेलनेस में मदद करता है, लेकिन यह किसी डेंटल ट्रीटमेंट का ऑप्शन नहीं है। दांतों की गंभीर समस्या होने पर तुरंत डेंटिस्ट से संपर्क करें। (Photo Source: Pexels) -
टिप
अगर इसमें सेंधा नमक या फिटकरी मिलाई गई हो, तो इसे रोज एक बार या एक दिन छोड़कर उपयोग करना बेहतर है। (Photo Source: Pexels)
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