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पानी के लिए जिस बर्तन का इस्तेमाल करते हैं वह किस धातु का बना है यह बेहद जरूरी है। पिछले कुछ सालों से तांबे और कांच की बोतलों का चलन बढ़ गया है। तांबे की बोतलों में प्राकृतिक जीवाणुरोधी (एंटीमाइक्रोबियल) गुण होते हैं। वहीं, कांच की बोतल पानी को शुद्ध रखने का काम करती हैं। इन दोनों के ही अलग-अलग फायदे हैं। हालांकि, कुछ नुकसान भी हैं। आइए जानते हैं: (Photo: Freepik)
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तांबे की बोतलें
जब पानी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस तांबे के संपर्क में आते हैं तो ये नष्ट हो जाते हैं। तांबे के आयन सूक्ष्म जीवों की कोशिकाओं में प्रवेश कर उन्हें नष्ट कर देते हैं। कई रिसर्च में बताया जा चुका है कि अगर तांबे के बर्तन में 16 घंटे तक पानी रखा जाए तो E. coli, Salmonella, और Shigella flexneri जैसे बैक्टीरिया नष्ट हो सकते हैं। (Photo: Pexels) -
तांबे के पानी के स्वास्थ्य लाभ
आयुर्वेद में तांबे के बर्तन में पानी पीने को काफी महत्व दिया गया है। इसे अनुसार ये पाचन सुधारने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, सूजन कम करने और त्वचा के लिए लाभकारी है। तांबा शरीर में एंजाइम्स के काम, कोलेजन निर्माण और एंटीऑक्सीडेंट को सही ढंग के बनाए रखने में मदद करता है। (Photo: Pexels) -
तांबे से लिंचिंग और विषाक्तता का जोखिम
नींबू पानी, फल जूस या गर्म पानी को तांबे के बर्तन में नहीं रखना चाहिए। ये चीजें एसिटिक अम्ल होती हैं जो तांबे से मिलते ही पानी में अधिक तांबा घोल सकती हैं। इससे मितली, पेट दर्द, दस्त और उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। (Photo: Pexels) दिमाग, लिवर और किडनी में कितनी देर में पहुंचता है पानी, जानें हाइड्रेशन की पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया -
वहीं, 8–12 घंटे से ज्यादा पानी रखने पर तांबे की मात्रा सुरक्षित सीमा से ऊपर जा सकती है। इससे लीवर और किडनी पर असर पड़ सकता है। ऐसे में लिवर, किडनी समस्या वाले, गर्भवती महिलाएं, बच्चे और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। (Photo: Freepik)
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कैसे करें साफ
तांबे के बर्तन को नियमित रूप से नींबू और नमक से साफ करना चाहिए। वहीं, पानी रात भर से ज्यादा नहीं रखना चाहिए। (Photo: Freepik) -
कांच की बोतल
कांच पानी के साथ प्रतिक्रिया नहीं करता और न ही कोई हानिकारक तत्व छोड़ता है। यह सादा पानी, अम्लीय पेय (एसिडिक) और हर्बल ड्रिंक्स के लिए सुरक्षित है। कांच BPA और फ्थैलेट्स से मुक्त होता है जिससे पानी का स्वाद नहीं बदलता और लंबे समय तक शुद्ध रहता है। (Photo: Pexels) -
वहीं, कई रिसर्च बताते हैं कि कांच की बोतलों में भी माइक्रोप्लास्टिक पाया गया है। खासकर पेंटेड प्लास्टिक कैप्स की वजह से। ढक्कन खोलने-बंद होने या यात्रा के दौरान छोटे प्लास्टिक कण (10–100 माइक्रोमीटर) पानी में मिल सकते हैं। ऐसे में मेटल या सिलिकॉन टक्कन वाले बोतल लेने चेहिए। (Photo: Pexels)
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कौन सा बोतल सही है
दोनों ही सेहत के लिए सही हैं। हालांकि, कांच के बोतल के ढक्कन मेटल या सिलिकॉन हों। वहीं, तांबे के बर्तन में 4-8 घंटे से अधिक पानी नहीं रखना चाहिए। (Photo: Pexels) देश के इन 7 शहरों का है सबसे शुद्ध जल, सीधे नल से पी सकते हैं पानी