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बॉलीवुड फिल्में गानों के बिना अधूरी मानी जाती हैं। हिंदी सिनेमा में कई ऐसे सिंगर्स रहे हैं जिनकी आवाज़ ने न सिर्फ फिल्मों को सुपरहिट बनाया, बल्कि दर्शकों के दिलों में भी खास जगह बनाई। इनकी आवाज का जादू ऐसा था कि गाने रिलीज होते ही चार्टबस्टर बन जाते थे। लेकिन समय के साथ कई दिग्गज सिंगर्स लाइमलाइट से दूर हो गए। आज हम ऐसे ही कुछ गायकों के बारे में बात कर रहे हैं, जिन्होंने एक दौर में हिंदी संगीत पर राज किया, मगर अब फिल्म इंडस्ट्री से लगभग गायब हैं।
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Kunal Ganjawala
‘भीगे होंठ तेरे प्यासा दिल मेरा’, ‘चन्नावे घर आ जा वे…’ जैसे सुपरहिट गानों को भला कौन भूल सकता है? इस आवाज़ के मालिक हैं कुणाल गांजावाला। 2004 में इमरान हाशमी की फिल्म ‘मर्डर’ का गाना भीगे होंठ उनकी ज़िंदगी का टर्निंग पॉइंट बना और उन्हें रातोंरात स्टारडम दिला गया। (Source: @kunalganjawalla/instagram) -
उन्होंने ‘कुछ कुछ होता है’ के कोई मिल गया, ‘धूम’ का सलामे और ‘सिंघम’ का मौला मौला जैसे कई हिट गाने गाए। करियर की शुरुआत में वे एक साल में 18-20 गाने रिकॉर्ड करते थे। लेकिन 2018 के बाद से उनकी आवाज बड़े बैनर की फिल्मों में सुनाई ही नहीं दी। शाहरुख खान की फिल्म ‘ज़ीरो’ के गाने अन-बान को उनका आखिरी बड़ा बॉलीवुड सॉन्ग माना जाता है। (Source: @kunalganjawalla/instagram)
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Sadhana Sargam
90 के दशक की मशहूर प्लेबैक सिंगर साधना सरगम ने करोड़ों दिलों पर राज किया है। उनका पहला सोलो गाना था ‘दूर नहीं रहना’, जो 1985 की फिल्म रुस्तम में शामिल था। इससे पहले भी उनकी आवाज़ 1982 की फिल्म ‘विधाता’ में सात सहेलियां गीत में सुनाई दी थी। (Source: Sadhana Sargam/Facebook) -
साधना सरगम भारत की एकमात्र ऐसी सिंगर हैं जिन्होंने हिंदी के अलावा 27 भाषाओं में गाने रिकॉर्ड किए। लेकिन बीते कुछ सालों में उनकी आवाज फिल्मों में कम सुनाई दी। 2021 की नेटफ्लिक्स फिल्म ‘मीनाक्षी सुंदरेश्वर’ में उनका गाया गाना ही उनका अब तक का आखिरी बॉलीवुड ट्रैक माना जाता है। (Source: Sadhana Sargam/Facebook)
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Shibani Kashyap
अपनी दर्दभरी सुरीली आवाज के लिए मशहूर शिबानी कश्यप ने 2003 में फिल्म ‘वैसा भी होता है – पार्ट 2’ के लिए सुपरहिट गाना ‘सजना आ भी जा’ गाया और लिखा था। यह गाना आज भी लोगों की प्लेलिस्ट में शामिल रहता है। (Source: Shibani Kashyap/Facebook) -
उन्होंने आगे चलकर जिंदा (2006) और 1971 (2007) जैसी फिल्मों के लिए भी गाने गाए। लेकिन 2014 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘आइडेंटिटी कार्ड’ का गाना सनाटा उनकी फिल्मों के सफर का आखिरी गाना बना। टीन प्रोग्राम्स, लाइव कॉन्सर्ट और म्यूजिक इवेंट्स में वे आज भी परफॉर्म करती हैं, लेकिन फिल्मों में उनकी उपस्थिति बेहद कम हो चुकी है। (Source: Shibani Kashyap/Facebook)
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Vinod Rathod
90 के दशक की पहचान रहे विनोद राठौड़ ने 1986 की फिल्म ‘बेदाग’ के गाने मेरे दिल में है अंधेरा से बॉलीवुड में एंट्री की। उन्होंने 3500 से ज्यादा गाने गाए और हिंदी के अलावा अंग्रेज़ी, गुजराती, मराठी, बांग्ला और फारसी भाषाओं में भी अपनी आवाज दी। (Source: Vinod Rathod/Facebook) -
उनके सुपरहिट गानों में ‘दीवाना’ का ऐसी दीवानगी और ‘खलनायक’ का नायक नहीं खलनायक हूं मैं आज भी लोगों को झूमने पर मजबूर कर देते हैं। लेकिन धीरे-धीरे वे भी फिल्मों से दूर होते गए। 2013 की फिल्म ‘जमानत’ का गाना क्या मोहब्बत है उनका आखिरी फिल्मी गीत माना जाता है। (Source: Vinod Rathod/Facebook)
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