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इंडियन फिल्म इंडस्ट्री में कई महान फिल्मकार हुए हैं जिनकी फिल्में न सिर्फ लोगों का मनोरंजन करती हैं बल्कि बेहद अहम और गंभीर मुद्दों को भी उठाती हैं। इन्हीं में से एक फिल्मकार थे वी शांताराम।
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1901 में कोल्हापुर में जन्में शांतारम ने मराठी और हिंदी सिनेमा में अपने काम के लिए जाने जाने जाते हैं। उन्होंने ‘डॉ. कोटनिस की अमर कहानी’, ‘झनक झनक झनक पायल बाजे’, और ‘दो आंखें बारह हाथ’ जैसी कई फिल्में बनाई है।
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शांताराम ने अपनी कुछ फिल्मों में खुद एक्टिंग भी की है। लेकिन उन्होंने एक डायरेक्टर के रूप में एक फिल्मफेयर, एक गोल्डन ग्लोब, एक राष्ट्रीय पुरस्कार और यहां तक कि बर्लिन अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में दो पुरस्कार जीते।
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शांताराम अपनी फिल्मों के साथ-साथ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर भी सुर्खियों में रहे हैं। दरअसल, शांताराम ने तीन शादियां की थीं, वो भी बिना किसी को तलाक दिए। दिलचस्प बात तो ये है कि उनकी तीनों पत्नियां एक ही घर में रहती थीं।
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जब शांताराम 20 साल के थे, तब उन्होंने दोनों परिवारों द्वारा तय रिश्ते के तहत अपनी पहली पत्नी विमलाबाई से शादी की थी। शांताराम और विमलाबाई ते चार बच्चे हैं। वहीं 20 के दशक के अंत में शांताराम जब फिल्म इंडसट्री में आए तब उनकी मुलाकात एक्ट्रेस जयश्री से हुई।
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शांताराम और जयश्री की मुलाकात धीरे-धीरे प्यार में बदल गई और पहले से शादीशुदा होने के बावजूद उन्होंने जयश्री से शादी कर ली। उनकी दूसरी पत्नी से उनके तीन बच्चे थे। वहीं, 55 साल की उम्र में उन्होंने एक्ट्रेस संध्या से तीसरी शादी की। उस वक्त संध्या की उम्र केवल 18 साल थी।
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दरअसल, जब उन्होंने ये शादियां कीं, तब भारत में बहुविवाह से जुड़े कानून नहीं बने थे। 1956 में खबर आई कि भारत सरकार इस मामले पर विचार कर रही है। वहीं जब यह कानून आया उससे कुछ दिन पहले ही शांताराम ने तीसरी शादी की, जिसकी वजह से उनकी काफी आलोचना भी हुई।
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हालांकि, आलोचनाओं के कारण शांताराम का पारिवारिक जीवन में ज्यादा प्रभाव तो नहीं पड़ा, मगर उसी साल उनका जयश्री से तलाक हो गया। मगर संध्या और विमलाबाई सालों तक एक ही घर में रहीं। वहीं शांताराम ने 88 वर्ष ककी आयु में 1990 में दुनिया को अलविदा कह दिया।
(Photos Source: Indian Express)
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