
जनसत्ता अखबार के स्तम्भ ‘दुनिया मेरे आगे’ में आज पढ़ें घनश्याम कुमार देवांश के विचार।

जनसत्ता अखबार के स्तम्भ ‘दुनिया मेरे आगे’ में आज पढ़ें घनश्याम कुमार देवांश के विचार।

योगेश कुमार गोयल बता रहे है कि ब्राजील के बेलेम में हुआ COP-30 जलवायु सम्मेलन बड़ी उम्मीदों के बावजूद जीवाश्म…

महिलाओं में बढ़ती बुनियादी समझ और स्पष्ट सरोकारी भाव के बावजूद उनकी नेतृत्वकारी भूमिका आज भी पीछे क्यों है? इस…

जनसत्ता अखबार के स्तम्भ 'दुनिया मेरे आगे' में आज पढ़ें पूनम पांडे के विचार।

गुवाहाटी में साउथ अफ्रीका से 408 रन की हार सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट की बदहाल व्यवस्था का…

शिशिर शुक्ला इस लेख में बता रहे हैं कि भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले विकासशील राष्ट्र के लिए भी यह…

जनसत्ता अखबार के स्तम्भ ‘दुनिया मेरे आगे’ में आज पढ़ें लवी मिश्रा के विचार।

समय कभी बोलता नहीं, लेकिन उसका मौन सबसे प्रखर भाषा है। यह हर व्यक्ति को उसकी हैसियत, कीमत और नियति…

देश में बच्चों से लेकर युवाओं तक में आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। पढ़ाई…

नशे के कई रूप हैं। अभी एक सबक केरल से मिला है। वहां डिजिटल तरीके से नशे के एक नए…

जनसत्ता अखबार के स्तम्भ ‘दुनिया मेरे आगे’ में आज पढ़ें रितुप्रिया शर्मा के विचार।

निडर पत्रकारिता के लिए PM मोदी की तारीफ एक तीखा सवाल खड़ा करती है — क्या आज भारतीय मीडिया सच…