Caste Politics: Caste Politics: उत्तर प्रदेश में परंपरागत रूप से जातीय राजनीति को एक बड़ा प्रभावी फैक्टर माना जाता रहा है। राज्य की राजनीति में जातीय समीकरणों को साधने के लिए राजनीतिक पार्टियां खासा जोर देती रही हैं। राज्य में जातीय समीकरण आधारित सरकारें भी बनीं और उन पर खूब चर्चा भी हुई है। लेकिन बीते पौने नौ वर्षों के दौरान यूपी की पॉलिटिक्स में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जातीय राजनीति के फैक्टर को विकास से तोड़ने की शोशिश की है।

‘सबका साथ-सबका विकास’ के विचार पर केंद्रित योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में जाति की राजनीति पर ‘ब्रेक’ लगाया और विकास के पहिए पर प्रदेश के सभी 75 जनपदों को दौड़ाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत, विश्व मानवता और चराचर जगत की रक्षा के लिए सनातन धर्म की रक्षा का संदेश दिया तो उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक पुनर्जागरण के अमृत काल की नींव रखी। सप्तपुरियों में से एक अयोध्या का कायाकल्प हुआ तो पीएम मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ धाम का जीर्णोद्धार किया गया।

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पौने नौ वर्ष में हुए कार्य पर गर्व करता है हिंदू समाज

उत्तर प्रदेश के मुखिया के रूप में योगी आदित्यनाथ ने पौने नौ वर्ष में ऐसे अनेक कार्य किए, जिस पर हिंदू समाज गौरव की अनुभूति करता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लगे महाकुम्भ प्रयागराज- 2025 में देश-विदेश से 66.30 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई। 2019 का कुम्भ स्वच्छता के लिए पूरी दुनिया में पहचाना गया था, जबकि महाकुम्भ 2025 ने भारत की इस प्राचीन परंपरा को ‘ग्लोबल हेरिटेज इवेंट के रूप में प्रस्तुत किया।

महाकुम्भ अनलिमिटेड पोटेंशियल वाले नए भारत के नए उत्तर प्रदेश को नई पहचान देने वाला सिद्ध हुआ। श्री अयोध्या जी तीर्थ विकास परिषद, श्री देवीपाटन तीर्थ विकास परिषद, उ.प्र. ब्रज तीर्थ विकास परिषद, श्री विंध्य धाम तीर्थ विकास परिषद, श्री चित्रकूट धाम तीर्थ एवं नैमिषारण्य धाम तीर्थ विकास परिषद उ.प्र. श्री शुक्र तीर्थ विकास परिषद का गठन किया गया।

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श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, दीपोत्सव व रंगोत्सव बने पहचान

पीएम मोदी के मार्गदर्शन व सीएम योगी के नेतृत्व में श्रीकाशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का निर्माण हुआ। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण, अयोध्या दीपोत्सव, ब्रज रंगोत्सव, काशी की देव-दीपावली, नैमिष तीर्थ व शुक्र तीर्थ पुनरुद्धार, मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा का 100 साल बाद पुनः प्रतिष्ठापन, सोरों-सूकर क्षेत्र विकास आदि कार्य हुए। हाथरस के ‘लक्खी मेला श्री दाऊजी महाराज, अयोध्या के ‘मकर संक्रांति मेला’ एवं ‘बसंत पंचमी मेला’, बुलंदशहर के ‘कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेला अनूपशहर’, वाराणसी के देव दीपावली मेले आदि का प्रांतीयकरण किया गया।

धर्मांतरण, लव जिहाद के खिलाफ आवाज उठाने संदेश

गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ ने विगत दिनों हरियाणा के कबलाना गांव में बाबा पालनाथ आश्रम में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा समारोह व आठ मान के भव्य भंडारा में भी सनातन समाज को आगाह किया था कि जब भारत का स्वर्णयुग आया था तब विदेशी हमले होने भी प्रारंभ हो गए थे। आज भी धर्मांतरण व नशा के माध्यम से हमला होगा और इसके पीछे विदेशियों का हाथ होगा। भारत, विश्व मानवता और चराचर जगत की रक्षा के लिए सनातन धर्म की रक्षा आवश्यक है। सनातन तभी सुरक्षित रहेगा, जब हम एक रहेंगे।

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जाति, तुष्टिकरण, क्षेत्र, भाषा के नाम पर बंटना नहीं है, बल्कि अयोध्या रामजन्मभूमि पर जैसे धर्मध्वजा फहरा रही है, वैसे ही एकजुट होकर भारत के सनातन धर्म की ध्वजा पताका हर सनातनी के घर पर फहराती दिखनी चाहिए। हर धार्मिक आयोजन में धर्मांतरण, लव जिहाद, नशे के खिलाफ आवाज उठनी चाहिए। अयोध्या में राम मंदिर पर फहरा रही धर्मध्वजा संदेश देती है कि सम-विषम परिस्थितियों में सनातन धर्म अपनी पताका को ऊंचा रखेगा।

गोरक्षपीठ के आयोजन भी देते हैं वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश

गोरक्षपीठ के आयोजन भी जातिवादियों को कड़ा संदेश देते हैं। यहां के मकर संक्रांति पर्व और खिचड़ी मेले भी एकता का मंत्र देते हैं। जातिवाद और भेदभाव मिटाकर यहां आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के जरिए समाज को जोड़कर ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना को बल प्रदान करने वाला आस्था का उत्सव ‘खिचड़ी मेला’ भारतीय संस्कृति व विरासत को मजबूत कर रहा है। गोरक्षपीठाधीश्वर/मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ खुद इस मेले की कमान संभालते हैं। पूर्वांचल की सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव खिचड़ी मेला न सिर्फ उत्तर प्रदेश, बल्कि पड़ोसी राज्य बिहार और पड़ोसी देश नेपाल के श्रद्धालुओं को भी एकता से जोड़ता है।

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