ड्रग्स से जुड़े मामलों के लिए सही मायने में इंडोनेशिया का कानून काफी सख्त है। खबर आ रही है इंडोनेशिया में ड्रग अपराधों में मौत की सजा पाने वाले 14 लोगों में से चार को मृत्युदंड दे दिया जा चुका है। आरोपियों को सजा 12 बजकर 45 मिनट पर दी गई। रिपोर्टों के मुताबिक फायरिंग स्क्वैड ने स्थानीय समय के अनुसार मध्य रात से कुछ देर बाद एक इंडोनेशियाई नागरिक और नाइजीरिया के तीन नागरिकों को मौत की सजा दी गई है। हालांकि अभी ये नहीं मालूम चला कि बाकी दस आरोपियों को मौत की सजा मिलेगी या नहीं। गौरतलब है कि बीते साल ड्रग्स अपराधों के 14 दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई थी। इनमें से कई नागरिक विदेशी हैं, जिनमें एक भारत के पंजाब से ताल्लुख रखने वाले गुरदीप सिंह भी शामिल हैं। 48 वर्षीय गुरदीप सिंह को 300 ग्राम हेरोइन की तस्करी करने की कोशिश में इंडोनेशिया में वर्ष 2004 में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि इन्हें बचाने के लिए भारत सरकार अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रही है। विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि मादक पदार्थ से जुड़े एक मामले में इंडोनेशिया में मौत की सजा का सामना करने जा रहे भारतीय नागरिक की जान बचाने के लिए सरकार आखिरी वक्त की कोशिशें कर रही है।
Making last minute efforts to save Gurdip Singh from execution in Indonesia:Sushma Swarajhttps://t.co/wQlJK6XBUI pic.twitter.com/tJi5vJaanH
— The Indian Express (@IndianExpress) July 28, 2016
Good news coming in from Indonesia as Zulfiqar Ali’s execution is being delayed apparently due to the appeal by Ambassador Aqil Nadeem 1/2
— Wajih Sani (@wajih_sani) July 28, 2016
इंडोनेशिया की मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने मौत की सजा पर अमल की निंदा करते हुए इसे ‘निंदनीय’ कार्रवाई बताया है जिससे ‘अंतरराष्ट्रीय और इंडोनेशिया के कानूनों का उल्लंघन होता है। वहीं यूनाईटेड नेशंंस ने इंडोनेशिया सरकार से सजा रोकने की अपील की है।
The death penalty doesn’t deter drug crimes (or murders either) – this is barbaric https://t.co/geVM3s78gJ via @TheWorldPost
— Matt Ferner (@matthewferner) July 28, 2016
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक परिजन को अंतिम विदाई देने के लिए दिन के वक्त वहां रिश्तेदार जुटे थे। द्वीप पर 17 एंबुलेंस भेजी गईं थी जिनमें से 14 में ताबूत पाए गए। बता दें ये जानकारी हमें भारतीय गुरदीप के जरिए भी मिली है, जिन्होंने अपनी पत्नी से फोन पर मरने के बाद शव को स्वदेश लाने को कहा।
जिन लोगों को मौत की सजा दी गई उनमें इंडोनेशिया 4 नागरिक हैं। उनमें इंडोनेशिया के फ्रेडी बडिमैन, नाइजीरिया के सेक ओसमैन, हम्फ्री जेफरसन एजिक और मिचेल टिटुज इग्वेह हैं।
इनके अलावा एक भारतीय, एक पाकिस्तानी, दो जिम्बाब्वे, दो नाइजिरिया और दो अन्य नागरिक शामिल हैं। ये फिलहाल अभी सेफ है। पाकिस्तान के जुल्फिकार अली पर भी ये आरोप लगा है। उनका कहना है कि जुल्फिकार की पिटाई की गई ताकि वो मान लें कि उनके पास हेरोइन थी। बाद में पाकिस्तान की सरकार की दखलंदाजी के बाद फिलहाल जुल्फिकार पर फैसला की सजा रोक दी गई। यही वजह है कि वहां के लोग इस वीडियो में खुशी मनाते नजर आ रहे हैं।
#Indonesia executes convicted drug traffickers, halts #ZulfiqarAli execution after Pakistani Govt intervenes pic.twitter.com/YD6BB9RJYk
— Murtaza Ali Shah (@MurtazaGeoNews) July 28, 2016
#Indonesia executes convicted drug traffickers, halts #ZulfiqarAli execution after Pakistani Govt intervenes pic.twitter.com/YD6BB9RJYk
दूसरी ओर इंडोनेशिया की मेरी उतामी के बारे में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें धोखे से ड्रग तस्करी के काम में लगाया गया था। साल 2014 में जब राष्ट्रपति विडोडो निर्वाचित हुए थे तब उन्होंने ड्रग तस्करी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने का वादा किया था। लिहाजा वे अपने वादे को अमल में ला रहे हैं।
उन्होंने कहा था कि दोषी ड्रग डीलरों की मौत की सजा को लेकर वो कोई समझौता नहीं करेंगे और अब वही हो रहा है। आपको बता दें कि इससे पहले अप्रैल 2015 में ऑस्ट्रेलिया के दो नागरिकों को मौत की सजा दिए जाने के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया ने पांच हफ्तों के लिए इंडोनेशिया से अपने राजदूत को हटा लिया था।
