देश के कुछ हिस्से पंजाब, हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम में लीवर सिरोसिस व लीवर कैंसर के मामले बढ़ते जा रहे हैं। जहां देश भर में हेपेटाइटिस सी के वायरस से करीब एक फीसद आबादी पीड़ित है वहीं इन राज्यों में इस संक्रमण की चपेट में आने का खतरा ज्यादा है। लीवर कैंसर के 12 से 32 फीसद मामले गंभीर हेपेटाइटिस सी का नतीजा हैं जबकि लइलाज बीमारी लीवर सिरोसिस के दस से 20 फीसद मामले हेपेटाइटिस सी की देन हैं। विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर शुक्रवार को इंस्टिट्यूट आॅफ लिवर व बिलियरी साइंस और विश्व स्वास्थ्य संगठन की साझीदारी में हुए एक कार्यक्रम में यह जानकारी दी गई।

संस्थान के मुखिया डॉक्टर एसके सरीन ने कहा कि देश भर में कुल करीब एक फीसद आबादी यानी करीब एक करोड़ 20 लाख लोग हेपीटाइटिस की चपेट में हैं। देखने में आया है कि देश के कुछ हिस्सों में वायरल सी का संक्रमण या इसका खतरा ज्यादा होता है। उन्होंने बताया कि आधुनिक इलाज से इसके 90 फीसद मामले ठीक हो सकते हैं। लेकिन इस दिशा में किए जा रहे प्रयास नाकाफी हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव डॉक्टर सीके मिश्र ने कहा कि देश में हेपेटाइटिस बी व सी से कुल पीड़ितों की संख्या करीब छह करोड़ है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में पीड़ितों की तादात देखते हुए एक राष्ट्रीय कार्ययोजना की तुरंत दरकार है और इस दिशा में पहल के साथ ही तय किया जाना चाहिए कि संसाधनों की कमी आड़े नहीं आए। उन्होंने कहा कि एंटी वायरल दवा जिसके प्रभावी नतीजे मामने आए हैं उसे अनिवार्य दवा की सूची में शामिल करने की दरकार है। इसे लोगों को मुफ्त में मुहैया कराना होगा।

डब्लूएचओ के प्रतिनिधि डॉक्टर हेंक बेकडैम ने कहा कि भारत में इसकी जांच के अधिक से अधिक केंद्र विकसित किए जाने चाहिए। सरीन ने कहा कि अगर देश में हाईवे बनाने के लिए होने वाले खर्च का महज एक फीसद बजट हर साल हेपेटाइटिस के लिए दिया जाए तो इसका खात्मा जल्द संभव होगा।