केजरीवाल और उनकी सरकार की ओर से दिल्ली की जनता से किए गए वादे तो कहीं गुम से ही हो गए हैं। विधानसभा चुनाव के वक्त आप की ओर से घोषणा की गई थी कि राजधानी में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, दिल्लीवालों को फ्री वाई-फाई मिलेगा और दिल्ली में 500 स्कूल व 14 कॉलेज बनाए जाएंगे। बीते डेढ़ साल में इन सारी घोषणाओं पर क्या अमल हुआ? इसका जवाब अब न तो केजरीवाल दे रहे हैं और न उनकी पार्टी।
करीब डेढ़ साल पुरानी आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को विरोध की राजनीति करने के कारण लगातार कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि कई विवाद तो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी ने खुद ही पाले हैं। इन सबका असर दिल्ली की विकास योजनाओं पर पड़ रहा है। केजरीवाल सरकार कभी केंद्र से तो कभी उपराज्यपाल से और कभी नगर निगमों से उलझती ही रहती है। इसके कारण सरकार की ओर से शुरू किए जा रहे विकास कार्यों पर भी सवालिया निशान लग गया है।
आप सरकार की ओर से की गई चुनावी घोषणाओं को लागू कराने के लिए बनाए गए दिल्ली डायलॉग कमीशन की दिल्ली के विकास को लेकर अधिकारियों के साथ चल रही बैठकों पर भी विराम लग गया है। हालांकि मौजूदा समय में यह कमीशन भी विवादों में है। कहा जा रहा है कि पिछले दिनों पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर आप ने जो घोषणापत्र जारी किया है, उसे दिल्ली डायलॉग कमीशन के उपाध्यक्ष आशीष खेतान ने तैयार किया है। उस विवादास्पद घोषणापत्र में जो तस्वीरें दी गई हैं, उससे सिख समुदाय के लोग काफी आहत हैं। इसके विरोध में वे केजरीवाल के निवास पर प्रदर्शन भी कर चुके हैं और आशीष खेतान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
हवा-हवाई, वाईफाई
दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने के दौरान केजरीवाल सरकार ने कहा था कि उसका मुख्य एजंडा भ्रष्टाचार खत्म करना, महिलाओं को सुरक्षा देना और दिल्लीवासियों को आधे दाम पर बिजली व मुफ्त पानी उपलब्ध कराना है। इसके बाद सरकार ने चुनावी घोषणाएं लागू कराने के लिए दिल्ली डायलॉग कमीशन बनाया और अपना ध्यान विकास कार्यों की ओर लगा दिया। सरकार की एक अहम प्राथमिकता दिल्ली में वाई-फाई मुहैया कराना था। दिल्ली डायलॉग कमीशन ने घोषणा भी की थी कि वह कुछ इलाकों और कॉलेजों में फ्री वाई-फाई उपलब्ध कराएगा। इस घोषणा को भी करीब सात महीने हो चुके हैं और अब सरकार कह रही है कि इस साल दिसंबर तक वह पूर्वी दिल्ली के 500 स्थानों पर वाई-फाई सेवा मुहैया करवाएगी।
भ्रष्टाचार बनाम भ्रष्टाचार
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लगता है कि राजधानी में सभी समस्याओं की जड़ भ्रष्टाचार ही है। उनका मानना है कि अगर सभी विभागों से भ्रष्टाचार दूर हो गया, तो दिल्ली की सभी समस्याएं दूर हो जाएंगी। इसी के मद्देनजर उन्होंने एक भव्य कार्यक्रम में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक हेल्पलाइन शुरू की। उन्होंने भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) में बड़े बदलाव करने का फैसला भी किया। बस यहीं से उनकी सरकार की टकराव की राजनीति शुरू हो गई। केजरीवाल सरकार ने एसीबी का बजट बढ़ा दिया और इस विभाग में अपने चहेते अधिकारियों की तैनाती की कवायद शुरू कर दी। केजरीवाल एम्स में भ्रष्टाचार से लड़ने वाले संजीव चतुर्वेदी को इस विभाग का मुखिया बनाना चाहते थे, लेकिन केंद्र सरकार से अब तक इसकी इजाजत नहीं मिली है।
केंद्र सरकार ने आप की बढ़ती लोकप्रियता पर लगाम लगाने के लिए संयुक्त पुलिस आयुक्त मुकेश मीणा को एसीबी का प्रमुख बना दिया। मीणा वही अधिकारी हैं, जिन्होंने जंतर-मंतर पर आप की किसान रैली में खुदकशी करने वाले किसान गजेंद्र सिंह की मौत के मामले की जांच की है। केजरीवाल सरकार इस मामले में हाई कोर्ट गई और मीणा पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। वहीं एसीबी भी घोटाले के पुराने मामलों को तलाश कर केजरीवाल सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश में हैं। हाल ही में उसने टैंकर घोटाले को लेकर एफआइआर दर्ज की है।
