उत्तर प्रदेश के संभल जिले की शाही जामा मस्जिद में सर्वे के बाद भड़की हिंसा में मारे गए चार लोगों को गोली किसने मारी? इस सवाल का जवाब अभी तक सामने नहीं आ सका है। जिले के पुलिस अधीक्षक ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पुलिसकर्मियों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए ‘हवा में चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं’ थीं। एक वीडियो सामने आया था जिसमें कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी को हथियार चलाते हुए दिखाया गया है। इस पर एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा, “एक पुलिसकर्मी को हवा में गोली चलाते हुए देखा जा सकता है। हम जांच कर रहे हैं कि किसने दो गोलियां चलाईं।”
हिंसा के एक दिन बाद दिया गया बयान अलग था
जिले के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने हिंसा के एक दिन बाद 25 नवंबर को कहा था कि पुलिस ने केवल पैलेट गन का इस्तेमाल किया है। तीनों मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि उनकी मौत .315 बोर की बंदूक से गोली लगने से हुई। अब इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा है कि गोली सिर्फ हवा में चलाई गई थी, ताकि भीड़ को तितर-बितर किया जा सके।
मुरादाबाद के संभागीय आयुक्त आंजनेय कुमार सिंह ने भी मृतकों में से एक नईम के माता-पिता के इस दावे का खंडन किया था कि उसकी मौत पुलिस गोलीबारी में हुई है। कथित तौर पर गोली के छर्रे लगने से घायल हुए कुछ पुलिसकर्मियों का जिक्र करते हुए आंजनेय कुमार सिंह ने कहा था, “पुलिस खुद पर गोली नहीं चला सकती। अगर उनका बेटा पत्थर फेंकने की योजना बना रहा था तो उसे रोकना परिवार के सदस्यों की जिम्मेदारी थी। तीन समूह एक-दूसरे पर गोलियां चला रहे थे। हमारे पास सबूत हैं, लेकिन अभी हमारी प्राथमिकता शांति बहाल करना है।”
जब एक पुलिसकर्मी द्वारा कथित तौर पर गोली चलाए जाने के वीडियो के बारे में पूछा गया तो आंजनेय कुमार सिंह ने कहा, “गोली लगने से चार लोगों की मौत जांच का हिस्सा है। उनकी हत्या कैसे हुई और उन्हें किसने गोली मारी, यह हमारी जांच का हिस्सा है। एक बार जब हमें रिपोर्ट मिल जाएगी, तो यह स्पष्ट हो जाएगा।”
एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि शाही जामा मस्जिद सर्वे के दिन पुलिस को मस्जिद और सर्वे कर रही टीम की सुरक्षा सुनिश्चित करने का काम सौंपा गया था।
