पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गुरुवार को एक बार फिर नोटबंदी के फैसले को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ मिलकर आजादपुर मंडी मे एक रैली को संबोधित किया। रैली में बनर्जी ने कहा, ‘ऐसा संकट तो आपातकाल के दौरान भी नहीं देखा था। यह फैसला भारत को 100 साल पीछे ले जा सकता है। आगे को छोड़ो, देश को पीछे कर दिया। अगर आपमें हिम्मत है तो हमें जेल भेजो और गोली मारो। लेकिन हम हमारी लड़ाई जारी रखेंगे। हम गरीब लोगों को भूखा नहीं मरने देंगे। हमारे देश के लिए लड़ाई जारी रहेगी। पहले नोट बदलने की सीमा 4500 रुपए थी, जो कि अब घटाकर 2000 रुपए कर दी गई है। वे देश को बेचना चाहते हैं। क्या वे संविधान को तोड़ना चाहते हैं। हम उन्हें यह अनुमति नहीं देंगे।’
अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने भी सरकार से नोटबंदी तीन दिनों में वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा, ‘हम कालेधन के खिलाफ संघर्ष का समर्थन करते हैं लेकिन गरीब और वंचित लोग परेशान नहीं होने चाहिएं। हम चुप नहीं रहेंगे और यदि तीन दिन में ऐसा नहीं किया जाता है तो देशवासी आपको नहीं बख्शेंगे।’ लोगों के वास्ते अपना संघर्ष जारी रखने पर जोर देते हुए ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार को चुनौती दी, ‘मैं डरी हुई नहीं हूं। मैं अपना संघर्ष जारी रखूंगी। यदि आपमें साहस है तो मुझे जेल में डाल दीजिए, मुझे गोली मार दीजिए।’ विमुद्रीकरण के खिलाफ अपनी लड़ाई को ‘देश, गरीबों एवं भूखे लोगों को बचाने’ का संघर्ष करार देते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने आपातकाल में भी ऐसा संकट नहीं देखा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा, ‘यह फैसला देश को 100 साल पीछे ले जा सकता है। सरकार हर रोज एक फैसले के साथ सामने आती है। परसों कहा गया था कि नोट बदलने की सीमा 4500 होगी और आज आप कहते हें कि यह 2000 रुपए है।’
उन्होंने इस दलील का मजाक उड़ाया कि लोगों को प्लास्टिक मनी का उपयोग करना चाहिए एवं कहा कि भारत में महज चार फीसदी विनिमय के लिए कार्ड का उपयोग करते हैं। उन्होंने कहा, ‘दूसरे दिन, यह कहा गया कि अंगुलियों पर स्याही लगायी जाएगी। यह चल क्या रहा है? क्या हम नौकर हैं, क्या हम चोर हैं और आप ईमानदार? क्या हर व्यक्ति चोर है?’ वैसे उन्होंने विमुद्रीकरण की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति गठित करने की कुछ विपक्षी दलों की मांग यह कहते हुए खारिज कर दी कि ऐसी समितियों से अतीत में कोई नतीजा निकला नहीं। कालेधन पर रोक पर सरकार की कटिबद्धता पर सवाल खड़ा करते हुए उन्होंने पूछा कि विदेशों में रखे गए कालेधन को वापस लाने के लिए क्या कदम उठाए गए।
