अमेरिका की सेंट्रल इंटेलीजेंस एजेंसी (सीआईए) के द्वारा धार्मिक आतंकी संगठन बताए जाने के बाद विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने उसके खिलाफ विश्वव्यारी आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है। वीएचपी ने शुक्रवार (15 जून) को सीआई को धमकी दी कि अगर धार्मिक आतंकी संगठन का तमगा नहीं हटा तो वह चुप नहीं बैठेगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विश्व हिंदू परिषद की तरफ से दावा किया गया कि वह एक राष्ट्रवादी संगठन है जो कि देश की भलाई में काम करता है। वीएचपी ने सीआईए के आरोपों को निराधार और झूठा बताया। वीएचपी की तरफ से एक बयान में कहा गया कि अमेरिका की इंटेलीजेंस एजेंसी ओसामा बिना लादेन को पैदा करने के लिए जिम्मेदार थी और उसे नैतिक पाठ पढ़ाने का कोई अधिकार नहीं है। वीएचपी की तरफ से वह नक्शा भी दिखाया गया जो सीआईए इस्तेमाल करती है। वीएचपी ने सीआईए के नक्शे में जम्मू-कश्मीर को गैर-भारतीय क्षेत्र दिखाने की बात कही और कहा कि यह इस बात की पुष्टि करने के लिए काफी है कि अमेरिकी एजेंसी भारत विरोधी मानसिकता रखती है।
वीएचपी नेता सुरेंद्र जैन ने कहा कि इस काम के लिए सीआईए को मांफी मांगनी चाहिए और अपनी गलती को सुधारना चाहिए। उन्होंने भारत सरकार से कहा कि वह इस मुद्दे को वॉशिंटन ले जाए। वीएचपी के अलावा सीआईए ने बजरंग दल को भी धार्मिक आतंकी संगठन बताया है। सीआईए की फैक्टबुक में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का अभिभावक संगठन और एक राष्ट्रवादी संगठन बताया है।
बता दें कि सीआईए हर साल 4 जून को अपनी एक फैक्टबुक जारी करती है, जिसमें अलग-अलग देशों के इतिहास, सरकारों, आर्थिक स्थिति, ऊर्जा, भौगोलिक स्थिति, संचार और सैन्य ताकत जैसी अहम जानकारियां दर्ज की जाती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सीआईए के पास वर्तमान में 267 देशों से जुड़ी जानकारियां हैं। कहा जाता है कि सीआईए ने इन जानकारियों को 1962 में जुटाना शुरू किया था लेकिन 1975 से उन्हें सार्वजनिक किया। इस वर्ष की फैक्टबुक में सीआईए ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस, महमूद मदनी की जमीयत उलेमा-ए-हिंद को राजनीतिक दबाव वाले संगठन में गिना है। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस को अलगाववादी संगठन और उलेमा-ए-हिंद को धार्मिक संगठन बताया है।
