नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने गुरुवार (30 अगस्त) को बड़ा बयान दिया। नोटबंदी के बारे में बोलते हुए उन्होंने बहुत सी बातें साफ की। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के कारण पैसा काले से सफेद नहीं हुआ है। लेकिन वह स्लेटी जरूर हुआ है। काला धन अभी भी वहीं मौजूद है, जहां वह था। राजीव कुमार का बयान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार ने नोटबंदी कारोबारियों के काले धन को सफेद करने के लिए की थी।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने समाचार एजेंसी एएनआई को दिए बयान में कहा,” नोटबंदी की वजह से करंसी काले से सफेद नहीं हुई है। लेकिन वह स्लेटी जरूर हो गई है। वह अभी भी वहीं है, जहां थी। नकद से लेनदेन में भी कमी आई है। अगर देश में ऐसा भय पैदा हुआ है कि कैश में लेनदेन करना गलत है। तो क्या यह नोटबंदी का प्रभाव नहीं है?
Who said that the sole purpose of demonetisation was that less currency should be deposited?Over Rs 3-4 lakh cr have returned to system & are under the scanner of tax authorities.Notices were sent on 18 lakh accounts & probe is underway in lakhs of them: Niti Aayog VC Rajiv Kumar pic.twitter.com/75W2jTRUt4
— ANI (@ANI) August 30, 2018
The currency might not have turned from black to white, but at least it has turned to grey. It is still there. Cash transactions have also been reduced. If fear has developed in the nation against cash transactions by wrong means, isn’t it an effect of demonetisation?:Rajiv Kumar pic.twitter.com/fg5qCPVBRh
— ANI (@ANI) August 30, 2018
राजीव कुमार ने आगे कहा,” कौन कहता है कि नोटबंदी का इकलौता मकसद यही था कि कम करंसी बैंक में जमा हो? 3-4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा वापस सिस्टम में लौट आया है। ये सारा पैसा कर प्राधिकरणों की निगरानी में है। वह इसे देख रहे हैं। करीब 18 लाख खाताधारकों को नोटिस भेजे गए हैं जबकि लाखों के खिलाफ जांच अभी भी जारी है।”
वैसे बता दें कि गुरुवार को ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में नोटबंदी को निशाना बनाया था। उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री ने नोटबंदी सिर्फ देश के लोगों की जेब से पैसा निकालकर कारोबारियों की जेबों में डालने के लिए की थी। नोटबंदी का देश में कोई भी असर नहीं दिखा। अलावा इसके कि इसकी वजह से छोटे कारोबारी, दुकानदार और मध्यम वर्ग का कारोबारी तबाह हो गया।

