उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में बेसिक शिक्षा मंत्री और इटवा विधायक डॉ. सतीश द्विवेदी के भाई को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) कोटे से असिस्टेंट प्रोफेसर बना दिया गया है। ‘हिंदुस्तान’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक सतीश द्विवेदी के भाई अरुण द्विवेदी की नियुक्ति सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के मनोविज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर की गई है।
शुक्रवार को अरुण द्विवेदी ने विश्वविद्यालय जॉइन किया जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ा और सोशल मीडिया में इसको लेकर चर्चा होने लगी। पत्रकार पंकज झा ने इसको लेकर एक ट्वीट किया है। उन्होने लिखा “यूपी सरकार के एक मंत्री ने जुगाड़ लगा कर अपने सगे भाई को यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर की नौकरी लगवा दी .. आपदा के समय भी अवसर पा कर मंत्री जी ने अपने भाई को आत्मनिर्भर बना दिया।”
#यूपी सरकार के एक मंत्री ने जुगाड़ लगा कर अपने सगे भाई को यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर की नौकरी लगवा दी .. आपदा के समय भी अवसर पा कर मंत्री जी ने अपने भाई को आत्मनिर्भर बना दिया
— पंकज झा (@pankajjha_) May 22, 2021
इसपर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजीव राय ने लिखा “पंकज भाई जिस राज्य में सरकार ने लाशों को आत्मनिर्भर बना दिया, वहाँ मंत्री जी ने अपने भाई को आत्मनिर्भर बना दिया तो ये कोई न्यूज़ है?” झा ने एक अन्य ट्वीट कर लिखा “प्रभु .. लाखों क़ाबिल लोग सड़क पर हैं और किसी को सिर्फ़ मंत्री के भाई के नाते नौकरी मिल जाए .. तो चाल, चरित्र और चेहरा वाले दावे का क्या।”
हालांकि कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे का कहना है कि मनोविज्ञान में करीब डेढ़ सौ आवेदन आए थे। मेरिट के आधार पर 10 आवेदकों का चयन किया गया। इसमें अरुण द्विवेदी का भी नाम था। आवेदकों का जब इंटरव्यू हुआ तो अरुण दूसरे स्थान पर रहे। इंटरव्यू, एकेडमिक व अन्य अंकों को जोड़ने पर अरुण पहले स्थान पर आ गए। इस वजह से इनका चयन हुआ है।
कुलपति ने आगे कहा कि उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से पता चला कि वे विधायक के भाई है। सुरेंद्र दुबे ने कहा कि अगर ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र फर्जी होगा तो दंड के भागी होंगे।

