भारत और रूस ने मंगलवार को भारतीय नौसेना के लिए गोवा में दो मिसाइल युद्धपोतों के निर्माण के लिए 50 करोड़ डॉलर के सौदे पर दस्तखत किए। दोनों देशों ने अमेरिका की पाबंदियों की चेतावनी के बावजूद रक्षा सहयोग जारी रखने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली के बाद यह दूसरा बड़ा सौदा है, जिसको लेकर दोनों देशों ने करार किए हैं। मंगलवार को भारत और रूस ने तकनीक हस्तांतरण मॉडल के तहत इस सौदे पर दस्तखत किए। एस-400 सौदे के छह महीने के भीतर यह करार किया गया है।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, रक्षा क्षेत्र की सरकारी कंपनी गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) और रूस की सरकारी रक्षा निर्माता- रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के बीच तलवार श्रेणी के दो युद्धपोतों के निर्माण के लिए करार किया गया। यह समझौता रक्षा सहयोग के लिए सरकार से सरकार के बीच सहयोग की रूपरेखा के तहत किया गया। इस सौदे के तहत रूस भारत में युद्धपोतों के निर्माण के लिए जीएसएल को डिजाइन, प्रौद्योगिकी और कुछ सामग्री प्रदान करेगा। जहाजों में अत्याधुनिक मिसाइलें और अन्य शस्त्र प्रणालियां लगी होंगी।

जीएसएल के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक शेखर मित्तल के मुताबिक, ‘हमने गोवा में दो युद्धपोतों के निर्माण के लिए रूस के साथ 50 करोड़ डॉलर के समझौते को अंतिम रूप दिया है। युद्धपोतों का निर्माण 2020 में शुरू होगा और पहला जहाज 2026 में जलावतरण के लिए तैयार होगा। दूसरा 2027 तक तैयार होगा। रूस जिन दो युद्धपोतों को बनाने के लिए भारत को मदद दे रहा है, वे सोनार और रडार की पकड़ में नहीं आएंगे।

स्टील्थ तकनीक के कारण दुश्मन के इलाके में इन्हें अपने मिशन को पूरा करने में काफी मदद मिलेगी। युद्धपोतों को आधुनिक मिसाइल और अन्य हथियार प्रणालियों से लैस किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस सौदे के अलावा भारत और रूस एक अरब डॉलर के अन्य एक सौदे पर पहले ही करार कर चुके हैं। इसके तहत रूस 2023 तक भारत को दो युद्धपोत देगा।