भारत सरकार की राज्यों के साथ हुई सालाना पूर्व-बजट बैठक में तमिलनाडु ने अपनी आर्थिक परेशानियों को सामने रखा। राज्य ने कहा कि कई केंद्रीय परियोजनाओं के लिए पैसा समय पर नहीं मिल रहा है। जीएसटी लागू होने के बाद राज्य की आमदनी भी घट गई है। इसके अलावा, विदेशों से आने वाले व्यापारिक झटकों का खतरा बढ़ रहा है, खासकर अमेरिका द्वारा हाल में लगाए गए नए टैरिफ (आयात शुल्क) की वजह से। तमिलनाडु ने इन समस्याओं को देखते हुए केंद्र से बेहतर वित्तीय मदद और समर्थन की मांग की।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई बैठक में तमिलनाडु के वित्त मंत्री थंगम थेनारासु ने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच खातों से जुड़े कुछ मुद्दे अभी भी सुलझे नहीं हैं। उनका कहना था कि इन वजहों से तमिलनाडु की असली वित्तीय स्थिति ठीक से दिखाई नहीं देती और इसी कारण राज्य की कर्ज लेने की क्षमता भी कम हो रही है।
थंगम थेनारासु ने कहा कि केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2024 में लंबे समय से लंबित चेन्नई मेट्रो रेल चरण-II परियोजना को मंजूरी दी थी। हालांकि, डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी राज्य को इस मंजूरी का पूरा लाभ नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु ने परियोजना में केंद्र सरकार के हिस्से के लिए पहले ही लगभग 9,500 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान कर दिया है।
उन्होंने कहा कि खातों की इस गड़बड़ी से राज्य का कर्ज-और-आय (ऋण-GSDP) अनुपात गलत दिखता है और इसी वजह से राज्य को कम कर्ज लेने की अनुमति मिलती है। उन्होंने केंद्र सरकार से कहा कि कैबिनेट की मंजूरी के मुताबिक खातों में सही प्रविष्टियां की जाएं, ताकि खर्च दोनों बजटों में ठीक तरह से दर्ज हो सके।
तमिलनाडु के वित्त मंत्री ने केंद्र से मदुरै और कोयंबटूर में मेट्रो रेल परियोजनाओं पर फिर से विचार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं को जिस कारण से खारिज किया गया, वह दूसरे शहरों को मिली मंजूरी से मेल नहीं खाता। उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था निर्यात पर काफी निर्भर है, इसलिए वैश्विक व्यापार में किसी भी तरह की रुकावट से राज्य को बड़ा नुकसान होता है। खास तौर पर अमेरिका द्वारा हाल में बढ़ाए गए टैरिफ से तमिलनाडु के निर्यात पर बुरा असर पड़ा है।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के 31% माल निर्यात का उद्देश्य अमेरिकी बाजार है, इसलिए ये उपाय राज्य को अन्य राज्यों की तुलना में अधिक गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। उन्होंने विनिर्माण और रोजगार संबंधी जोखिमों की ओर इशारा किया। विशेष रूप से कपड़ा उद्योग पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि चूंकि तमिलनाडु भारत के कपड़ा निर्यात का 28% हिस्सा है और 75 लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार प्रदान करता है, इसलिए यह राष्ट्रीय चिंता का विषय है।
थेनारासु ने कहा कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो करीब 30 लाख नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं और कई छोटी-मझोली कंपनियां बंद होने की स्थिति में आ जाएंगी। इसलिए उन्होंने केंद्र सरकार से खास कदम उठाने की मांग की। उन्होंने वस्त्र (टेक्सटाइल) उद्योग के लिए अलग से एक मदद पैकेज देने को कहा, जिसमें सस्ते ब्याज पर कर्ज, कुछ सीधे अनुदान, निर्यात को बढ़ावा देने के उपाय और कर में राहत शामिल हों।
मंत्री ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लेकर वही पुरानी चिंता फिर उठाई जो राज्य सरकारें काफी समय से जता रही हैं। उन्होंने कहा कि जब जीएसटी लागू किया गया था, तब राज्यों ने अपनी कर वसूली की कुछ शक्तियां केंद्र को इसलिए दी थीं, क्योंकि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि उनके राजस्व में कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। लेकिन अब मुआवजा व्यवस्था खत्म हो जाने के बाद राज्यों को नुकसान हो रहा है, और उनकी आमदनी की सही तरह से सुरक्षा नहीं हो पा रही है।
उन्होंने कहा कि समय के साथ राज्यों को दिया गया भरोसा कमजोर पड़ गया है। उनका कहना था कि सिर्फ तमिलनाडु को ही इस वित्त वर्ष में करीब 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। इसलिए उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि राजस्व की कमी की भरपाई के लिए फिर से मुआवजा व्यवस्था शुरू की जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अब उपकर और अधिभार पर ज्यादा निर्भर हो गई है। उनका कहना था कि इनसे लोगों पर टैक्स का बोझ तो बढ़ता नहीं, लेकिन इससे मिलने वाला सारा पैसा केंद्र सरकार के पास ही जाता है, राज्यों को उनका हिस्सा नहीं मिलता। इसलिए उन्होंने मांग की कि इन शुल्कों को मूल टैक्स में शामिल किया जाए, ताकि राज्यों को उनका हक का हिस्सा मिल सके।
केंद्र सरकार की योजनाओं को लेकर भी उन्होंने नाराज़गी जताई। विकसित भारत–रोज़गार और आजीविका मिशन का हवाला देते हुए थेन्नारासु ने कहा कि नई फंडिंग व्यवस्था से राज्यों पर खर्च का बोझ बहुत बढ़ गया है। उनके मुताबिक, सिर्फ तमिलनाडु पर ही करीब 5,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई अहम कल्याणकारी योजनाओं का पैसा समय पर नहीं मिल रहा है। जल जीवन मिशन के तहत सितंबर 2024 से कोई फंड जारी नहीं किया गया है, जबकि तमिलनाडु को 3,112 करोड़ रुपये तुरंत चाहिए। इसके अलावा होगेनक्कल जल आपूर्ति परियोजना के तीसरे चरण के लिए केंद्र ने 2,283 करोड़ रुपये देने से मना कर दिया, जिससे यह परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है।
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इसी तरह, उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए समग्र शिक्षा योजना के तहत अपने स्वीकृत हिस्से की राशि, जो कि 3,548 करोड़ रुपये है, अभी तक जारी नहीं की है। इससे तमिलनाडु के 44 लाख छात्र और 2.4 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं।
अपने भाषण के अंत में मंत्री ने केंद्र से मांग की कि तमिलनाडु में बुनियादी ढांचे के लिए जल्द पैसा दिया जाए। उन्होंने औद्योगिक इलाकों में रेलवे में नए निवेश, चेन्नई-सलेम-कोयंबटूर को जोड़ने वाली अर्ध-उच्च गति रेल सेवा, और तांबरम से चेंगलपट्टू के बीच एलिवेटेड सड़क परियोजनाओं को प्राथमिकता देने की मांग की।
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